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कुशीनगर

स्तूपों, विहारों, खुदाइयों और अंतरराष्ट्रीय बौद्ध मंदिरों की बुद्ध महापरिनिर्वाण नगरी

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इस जगह को करीब से जानें

कुशीनगर - मल्लों की कुशीनारा और बुद्ध की अंतिम पवित्र भूमि

कुशीनगर प्राचीन कुशीनारा से पहचाना जाता है, जो मल्ल गणराज्य की राजधानी और सोलह महाजनपदों में से एक था। गौतम बुद्ध ने यहीं महापरिनिर्वाण प्राप्त किया, इसलिए यह विश्वभर में पूजनीय है। खुदाइयों में स्तूप, विहार और शयन मुद्रा बुद्ध प्रतिमा मिली, और आज विभिन्न बौद्ध परंपराओं के मंदिर इसे जीवंत तीर्थ बनाते हैं।

छठी सदी ईसा पूर्व

मल्लों की कुशीनारा

प्राचीन कुशीनारा मल्ल गणराज्य की राजधानी और सोलह महाजनपदों में से एक थी। यह मौर्य, शुंग, कुषाण, गुप्त, हर्ष और पाल काल से जुड़ी रही।

बुद्ध महापरिनिर्वाण

बुद्ध जीवन की अंतिम पवित्र घटना

कुशीनगर वह पवित्र स्थान है जहाँ गौतम बुद्ध ने अंतिम उपदेश दिया, महापरिनिर्वाण प्राप्त किया और रामाभार या मुकुटबंधन में उनका दाह संस्कार हुआ।

उन्नीसवीं सदी की खुदाई

कनिंघम और कार्लाइल द्वारा पुनः खोज

आधुनिक कुशीनगर का महत्व अलेक्जेंडर कनिंघम और सी एल कार्लाइल की पुरातात्विक खोजों से बढ़ा, जिन्होंने 1876 में मुख्य स्तूप और शयन बुद्ध प्रतिमा को उजागर किया।

आधुनिक जिला

1994 में नया जिला

स्वतंत्रता के बाद यह क्षेत्र देवरिया जिले का हिस्सा रहा, फिर 13 मई 1994 को कुशीनगर उत्तर प्रदेश का अलग जिला बना।

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वे जगहें जो याद रहेंगी।

बौद्ध स्थल

महापरिनिर्वाण मंदिर और स्तूप

कुशीनगर का मुख्य तीर्थ, जहाँ 6.10 मीटर लंबी शयन मुद्रा बुद्ध प्रतिमा और मुख्य महापरिनिर्वाण स्तूप के अवशेष हैं।

महापरिनिर्वाणशयन बुद्धस्तूप
बौद्ध स्तूप

रामाभार स्तूप मुकुटबंधन

बुद्ध के दाह संस्कार स्थल मुकुटबंधन को दर्शाता विशाल स्तूप, जो शांत हरे-भरे वातावरण में स्थित है।

रामाभारदाह स्थलमुकुटबंधन
बौद्ध मंदिर

माथा कुंवर मंदिर

एकाश्म बुद्ध प्रतिमा वाला महत्वपूर्ण मंदिर, जो कुशीनगर की प्रमुख पुरातात्विक खोजों में है।

माथा कुंवरबुद्ध प्रतिमापुरातत्व
संग्रहालय

कुशीनगर संग्रहालय

कुशीनगर पुरातात्विक क्षेत्र से मिली प्रतिमाओं, मूर्तियों, मुहरों, सिक्कों और प्राचीन वस्तुओं को दिखाने वाला संग्रहालय।

संग्रहालयखुदाईप्राचीन वस्तुएं
बौद्ध मंदिर

इंडो जापान श्रीलंका बौद्ध मंदिर

जापान से लाई गई धातु बुद्ध प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय बौद्ध मंदिर।

जापानश्रीलंकाबौद्ध मंदिर
Chinese Buddhist Temple in Kushinagar, Uttar Pradesh
बौद्ध मंदिर

चीनी बौद्ध मंदिर

लिन्ह सोन वियतनाम चीनी मंदिर के नाम से भी प्रसिद्ध, जहाँ वियतनामी और चीनी स्थापत्य शैली का सुंदर मेल है।

चीनी मंदिरवियतनामी शैलीबुद्ध
बौद्ध मंदिर

वाट थाई मंदिर

थाई स्थापत्य, बगीचों और शांत ध्यान वातावरण के लिए प्रसिद्ध विस्तृत बौद्ध मंदिर परिसर।

थाई मंदिरबगीचेध्यान
ध्यान उद्यान

मेडिटेशन पार्क

महापरिनिर्वाण मंदिर के पास शांत उद्यान, जहाँ जलाशय और हरित क्षेत्र ध्यान व विश्राम के लिए उपयुक्त हैं।

ध्यानउद्यानमहापरिनिर्वाण
प्राचीन मंदिर

सूर्य मंदिर तुर्कपट्टी

गुप्तकालीन सूर्य परंपरा से जुड़ा मंदिर, जहाँ खुदाई से मिली काले पत्थर की सूर्य प्रतिमा प्रसिद्ध है।

सूर्य मंदिरगुप्त कालसूर्य
जैन विरासत

पावा फाजिलनगर महावीर परंपरा

फाजिलनगर को प्राचीन पावा से पहचाना जाता है, जो भगवान महावीर और मल्ल विरासत से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है।

पावामहावीरजैन विरासत
पुरातात्विक स्थल

उस्मानपुर वीर भारी टीला

गाँव का पुरातात्विक टीला जहाँ 1996 में खुदाई शुरू हुई और जिसे जिला ऐतिहासिक पर्यटन स्थल के रूप में सूचीबद्ध करता है।

उस्मानपुरवीर भारी टीलाखुदाई
पुरातात्विक स्थल

फरेंदहा चुंदग्राम स्थल

फरेंदहा का ऐतिहासिक चुंदग्राम क्षेत्र, जहाँ 1998 में खुदाई शुरू हुई और जो जिले के छोटे पुरातात्विक परिदृश्य को दर्शाता है।

फरेंदहाचुंदग्रामखुदाई
पुरातात्विक टीला

बदुरांव टीला

बदुरांव में बढ़ीवा पोखरा के पास स्थित ऐतिहासिक टीला, जिसे स्थानीय रूप से अमरवन से जोड़ा जाता है।

बदुरांवटीलाअमरवन
ग्राम विरासत

बेली बकुलहर ऐतिहासिक स्थल

फाजिलनगर तहसील के बेली बकुलहर क्षेत्र का ऐतिहासिक ग्राम स्थल, जिसे स्थानीय विरासत के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

बेलीबकुलहरग्राम विरासत
ग्राम विरासत

धनहा बुद्ध परंपरा स्थल

ग्राम परंपरा से जुड़ा स्थल, जहाँ स्थानीय स्मृति बुद्ध के श्री रामजानकी मंदिर के पास आगमन से जुड़ती है।

धनहाबुद्ध परंपराराम जानकी
आम रास्ते से थोड़ा अलग

जो शायद आपसे छूट रहा है।

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कुछ स्थानीय स्वाद चखें

कुशीनगर का भोजन

कुशीनगर का भोजन तीर्थ यात्रियों और पूर्वांचल के स्वाद से जुड़ा है: शाकाहारी थाली, लिट्टी-चोखा, सत्तू पराठा, कचौड़ी-सब्जी, चाय, मौसमी मिठाइयाँ और कसया तथा मंदिर क्षेत्र के सरल भोजन।

स्थानीय भोजन की सिफ़ारिशें जुटाई जा रही हैं।

एक दूसरे यात्री की नज़र से

यात्रा पत्रिका से।

संपादकीय समीक्षा के बाद नई कहानियाँ और रील्स यहाँ दिखाई देंगी।

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Before you set off.

अक्टूबर से मार्च सबसे अच्छा समय है। बुद्ध पूर्णिमा और अंतरराष्ट्रीय बौद्ध आयोजन विशेष होते हैं, लेकिन भीड़ अधिक रहती है।

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