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जौनपुर

अटाला मस्जिद, शाही पुल, शीतला चौकिया धाम और ऊनी दरी शिल्प वाला गोमती तट का शर्की विरासत जिला

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गहरवार, शर्की राजधानी, अकबरकालीन पुल और ऊनी कालीन शिल्प

जौनपुर गहरवार, तुगलक, शर्की, लोदी, मुगल, अवध और ब्रिटिश चरणों से होकर विकसित हुआ। चौदहवीं सदी के अंत में मलिक-उल-शर्क ने जौनपुर को राजधानी बनाया और शर्की काल में अटाला मस्जिद, जामा मस्जिद, लाल दरवाजा मस्जिद और शाही किला जैसे प्रमुख स्मारक बने। गोमती पर अकबरकालीन शाही पुल जिले की प्रमुख पहचान है। जौनपुर उन्नीसवीं सदी में अलग जिला बना।

प्राचीन-पूर्व मध्यकाल

भर, गहरवार और जफराबाद आधार

जौनपुर इतिहास में शर्की काल से पहले भर, सोइरिया, गहरवार और जफराबाद-यौनपुर परंपराओं का उल्लेख है। यह क्षेत्र कन्नौज, बनारस और जफराबाद के पुराने किला बसावटों से जुड़ा था।

1393-1484

शर्की राजधानी और स्थापत्य

मलिक-उल-शर्क ने जौनपुर को राजधानी बनाया और शर्की शासकों ने इसे शिक्षा, संस्कृति, संगीत, कला और स्थापत्य का बड़ा केंद्र बनाया। अटाला मस्जिद, जामा मस्जिद, लाल दरवाजा मस्जिद और अन्य स्मारक इसी काल से जुड़े हैं।

1564-1818

मुगल पुल और जिला निर्माण

अकबर शासन में 1564 में गोमती पर शाही पुल बनाया गया। बाद में जौनपुर अवध और ब्रिटिश प्रशासन से गुजरा। 1818 में डिप्टी कलेक्टरी शुरू हुई और जौनपुर अलग जिले के रूप में विकसित हुआ।

वर्तमान

दरी शिल्प, उद्योग और तीर्थ

आधुनिक जौनपुर शर्की स्मारकों, शीतला चौकिया धाम, गोमती किनारे शहर विरासत, ऊनी कालीन या दरी शिल्प, कृषि और सतहरिया औद्योगिक गतिविधि को साथ लेकर चलता है।

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वे जगहें जो याद रहेंगी।

Atala Masjid in Jaunpur, Uttar Pradesh
शर्की स्मारक

अटाला मस्जिद

1408 में इब्राहिम शाह शर्की द्वारा पूर्ण कराया गया प्रमुख शर्की स्मारक। ऊंचे प्रवेशद्वार, दीर्घाएं और विशाल रूप इसे बाद की जौनपुर मस्जिदों का आदर्श बनाते हैं।

मस्जिदशर्कीविरासत
किला विरासत

शाही किला, जौनपुर

गोमती के बाएं तट पर स्थित किला, मूल रूप से 1362 में बना। पूर्वी द्वार, मेहराब, तुर्की शैली स्नान, मस्जिद और नदी दृश्य शहर की महत्वपूर्ण विरासत हैं।

किलागोमतीविरासत
Shahi Pul in Jaunpur, Uttar Pradesh
अकबरकालीन पुल

शाही पुल

अकबर के आदेश पर 1564 में मुनीम खान खानखाना द्वारा गोमती पर बनाया गया प्रसिद्ध पुल। इसमें पुराने गुमटी स्थान, अष्टकोणीय पाये और सिंह-हाथी मूर्ति है।

पुलअकबरगोमती
शर्की मस्जिद

जामा मस्जिद, जौनपुर

शाहगंज रोड पर पुरानी बाजार के पास शर्की काल की बड़ी मस्जिद, जो हुसैन शाह के शासन में पूर्ण हुई और ऊंची सीढ़ियों, बड़े द्वारों व कलात्मक सज्जा के लिए प्रसिद्ध है।

मस्जिदशर्कीपुरानी बाजार
Sheetla Chaukiya Dham in Jaunpur, Uttar Pradesh
देवी मंदिर

शीतला चौकिया धाम

पुराना मां शीतला चौकिया देवी मंदिर, जो शिव-शक्ति पूजा और भर-यादव स्थानीय परंपराओं से जुड़ा है। सोमवार, शुक्रवार और नवरात्र में बड़ी भीड़ आती है।

मंदिरशीतला मातानवरात्र
Lal Darwaza Masjid in Jaunpur, Uttar Pradesh
शर्की मस्जिद

लाल दरवाजा मस्जिद

बेगमगंज में सुल्तान महमूद शाह शर्की की रानी द्वारा 1455 में बनवाई गई मस्जिद। इसमें प्रवेशद्वार, आंगन और पत्थर अभिलेख हैं।

मस्जिदलाल दरवाजाशर्की
शर्की अवशेष

झंझरी मस्जिद, सिपाह

गोमती के उत्तरी तट पर सिपाह मुहल्ले की प्रारंभिक शर्की मस्जिद। बाढ़ और ध्वंस क्षति के बावजूद बची मेहराब और झंझरी शैली विवरण महत्वपूर्ण हैं।

मस्जिदसिपाहशर्की
ऐतिहासिक मस्जिद

जामा मस्जिद, मछलीशहर

हुसैन शाह शर्की काल की मछलीशहर स्थित प्राचीन मस्जिद, जिसे जिला मुख्य शहर से बाहर के उल्लेखनीय स्थलों में सूचीबद्ध करता है।

मस्जिदमछलीशहरशर्की
ताल और प्रकृति

गुजर ताल और वन विहार

खेतासराय के पश्चिम का सुंदर ताल जहां मत्स्य पालन होता है, और टी.डी. कॉलेज-कुद्दूपुर रोड का वन विहार। प्रकृति और स्थानीय अवकाश सामग्री के लिए उपयोगी।

तालप्रकृतिखेतासराय
शहर विरासत

सदर इमामबाड़ा और पुराना शहर

सदर इमामबाड़ा, शाही पुल के पास शेर-की-मस्जिद, ईदगाह और पारंपरिक गलियों सहित पुराना शहर, जो मुख्य स्मारकों से आगे जौनपुर को दिखाता है।

पुराना शहरइमामबाड़ाविरासत
मंदिर मार्ग

केराकत काली मंदिर और गोमतेश्वर महादेव

जिले द्वारा सूचीबद्ध केराकत क्षेत्र का मंदिर मार्ग, जिसमें काली मंदिर और गोमतेश्वर महादेव शामिल हैं। छोटे तीर्थ स्थलों की कवरेज के लिए उपयोगी।

मंदिरकेराकतमहादेव
ओडीओपी शिल्प

मड़ियाहूं ऊनी दरी शिल्प क्लस्टर

मड़ियाहूं क्षेत्र का ओडीओपी ऊनी कालीन और दरी शिल्प क्लस्टर, जहां कारीगर हाथ से गांठदार और टफ्टेड फ्लोर कवरिंग बनाते हैं, जिनका निर्यात भी होता है।

ओडीओपीदरीकालीन
आम रास्ते से थोड़ा अलग

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कुछ स्थानीय स्वाद चखें

स्थानीय भोजन और उत्पाद

जौनपुर का ओडीओपी ऊनी कालीन या दरी है, खासकर मड़ियाहूं क्षेत्र के आसपास। जिला बेनीराम देवी प्रसाद इमरती, भोजपुरी-अवधी बाजार भोजन, कृषि, एग्रो-आधारित इकाइयों, कॉटन मिल और सतहरिया औद्योगिक क्षेत्र के लिए भी जाना जाता है।

मड़ियाहूं कारीगर क्षेत्र

ऊनी कालीन और दरी

जौनपुर का ओडीओपी उत्पाद ऊनी कालीन या दरी है, जिसे स्थानीय कारीगर हाथ से गांठदार और टफ्टेड रूप में बनाते हैं और जिला से बाहर भी बेचते हैं।

पुराना शहर मिठाई दुकानें

जौनपुर इमरती

जौनपुर इमरती के लिए जाना जाता है, खासकर पुरानी बेनीराम देवी प्रसाद परंपरा जिसका स्थानीय भोजन चर्चा में उल्लेख होता है।

जौनपुर शहर, शाहगंज और मड़ियाहूं

गोमती बाजार नाश्ता

कचौरी, जलेबी, पूरी-सब्जी, चाय और सरल थाली विरासत यात्रियों, तीर्थ यात्रियों और बस-रेल यात्रियों के लिए उपयोगी पड़ाव हैं।

सतहरिया और करंजाकला

कृषि और औद्योगिक उत्पाद

कृषि मुख्य आधार है, जबकि कॉटन मिल गतिविधि, एग्रो-आधारित इकाइयां और सतहरिया उद्योग स्थानीय अर्थव्यवस्था मूल्य जोड़ते हैं।

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Before you set off.

अक्टूबर से मार्च अटाला मस्जिद, शाही किला, शाही पुल, जामा मस्जिद, शीतला चौकिया धाम, गुजर ताल और कालीन क्लस्टर यात्रा के लिए अच्छा समय है। नवरात्र में शीतला चौकिया धाम में अधिक भीड़ रहती है।

अप्रैल से जून · 33-43 C

गर्मी

मैदानी गर्मी तेज रहती है। स्मारक, शीतला चौकिया और बाजार सुबह या शाम देखें।

जुलाई से सितंबर · 28-35 C

मानसून

उमस और बारिश रहती है। यात्रा से पहले गोमती और बसुही किनारे निचले क्षेत्र, ग्रामीण सड़कें और ताल मार्ग जांचें।

अक्टूबर से मार्च · 18-29 C

सर्दी

विरासत भ्रमण, शाही पुल, शाही किला, मस्जिदों, मंदिरों, गुजर ताल और दरी शिल्प क्लस्टरों के लिए सबसे अच्छा मौसम।

हवाई मार्ग

वाराणसी एयरपोर्ट लगभग 40 किमी

    रेल मार्ग

    जौनपुर सिटी और जौनपुर जंक्शन

      सड़क मार्ग

      जौनपुर शहर केंद्र में बस स्टैंड