अटाला मस्जिद
1408 में इब्राहिम शाह शर्की द्वारा पूर्ण कराया गया प्रमुख शर्की स्मारक। ऊंचे प्रवेशद्वार, दीर्घाएं और विशाल रूप इसे बाद की जौनपुर मस्जिदों का आदर्श बनाते हैं।
मस्जिदशर्कीविरासतअटाला मस्जिद, शाही पुल, शीतला चौकिया धाम और ऊनी दरी शिल्प वाला गोमती तट का शर्की विरासत जिला
Make room for जौनपुर in your next adventure.
Open trip planner →Know something this guide is missing?Share a hidden place, correction, accessibility detail or seasonal change with our editorial team.
जौनपुर गहरवार, तुगलक, शर्की, लोदी, मुगल, अवध और ब्रिटिश चरणों से होकर विकसित हुआ। चौदहवीं सदी के अंत में मलिक-उल-शर्क ने जौनपुर को राजधानी बनाया और शर्की काल में अटाला मस्जिद, जामा मस्जिद, लाल दरवाजा मस्जिद और शाही किला जैसे प्रमुख स्मारक बने। गोमती पर अकबरकालीन शाही पुल जिले की प्रमुख पहचान है। जौनपुर उन्नीसवीं सदी में अलग जिला बना।
जौनपुर इतिहास में शर्की काल से पहले भर, सोइरिया, गहरवार और जफराबाद-यौनपुर परंपराओं का उल्लेख है। यह क्षेत्र कन्नौज, बनारस और जफराबाद के पुराने किला बसावटों से जुड़ा था।
मलिक-उल-शर्क ने जौनपुर को राजधानी बनाया और शर्की शासकों ने इसे शिक्षा, संस्कृति, संगीत, कला और स्थापत्य का बड़ा केंद्र बनाया। अटाला मस्जिद, जामा मस्जिद, लाल दरवाजा मस्जिद और अन्य स्मारक इसी काल से जुड़े हैं।
अकबर शासन में 1564 में गोमती पर शाही पुल बनाया गया। बाद में जौनपुर अवध और ब्रिटिश प्रशासन से गुजरा। 1818 में डिप्टी कलेक्टरी शुरू हुई और जौनपुर अलग जिले के रूप में विकसित हुआ।
आधुनिक जौनपुर शर्की स्मारकों, शीतला चौकिया धाम, गोमती किनारे शहर विरासत, ऊनी कालीन या दरी शिल्प, कृषि और सतहरिया औद्योगिक गतिविधि को साथ लेकर चलता है।
1408 में इब्राहिम शाह शर्की द्वारा पूर्ण कराया गया प्रमुख शर्की स्मारक। ऊंचे प्रवेशद्वार, दीर्घाएं और विशाल रूप इसे बाद की जौनपुर मस्जिदों का आदर्श बनाते हैं।
मस्जिदशर्कीविरासतगोमती के बाएं तट पर स्थित किला, मूल रूप से 1362 में बना। पूर्वी द्वार, मेहराब, तुर्की शैली स्नान, मस्जिद और नदी दृश्य शहर की महत्वपूर्ण विरासत हैं।
किलागोमतीविरासतअकबर के आदेश पर 1564 में मुनीम खान खानखाना द्वारा गोमती पर बनाया गया प्रसिद्ध पुल। इसमें पुराने गुमटी स्थान, अष्टकोणीय पाये और सिंह-हाथी मूर्ति है।
पुलअकबरगोमतीशाहगंज रोड पर पुरानी बाजार के पास शर्की काल की बड़ी मस्जिद, जो हुसैन शाह के शासन में पूर्ण हुई और ऊंची सीढ़ियों, बड़े द्वारों व कलात्मक सज्जा के लिए प्रसिद्ध है।
मस्जिदशर्कीपुरानी बाजारपुराना मां शीतला चौकिया देवी मंदिर, जो शिव-शक्ति पूजा और भर-यादव स्थानीय परंपराओं से जुड़ा है। सोमवार, शुक्रवार और नवरात्र में बड़ी भीड़ आती है।
मंदिरशीतला मातानवरात्रबेगमगंज में सुल्तान महमूद शाह शर्की की रानी द्वारा 1455 में बनवाई गई मस्जिद। इसमें प्रवेशद्वार, आंगन और पत्थर अभिलेख हैं।
मस्जिदलाल दरवाजाशर्कीगोमती के उत्तरी तट पर सिपाह मुहल्ले की प्रारंभिक शर्की मस्जिद। बाढ़ और ध्वंस क्षति के बावजूद बची मेहराब और झंझरी शैली विवरण महत्वपूर्ण हैं।
मस्जिदसिपाहशर्कीहुसैन शाह शर्की काल की मछलीशहर स्थित प्राचीन मस्जिद, जिसे जिला मुख्य शहर से बाहर के उल्लेखनीय स्थलों में सूचीबद्ध करता है।
मस्जिदमछलीशहरशर्कीखेतासराय के पश्चिम का सुंदर ताल जहां मत्स्य पालन होता है, और टी.डी. कॉलेज-कुद्दूपुर रोड का वन विहार। प्रकृति और स्थानीय अवकाश सामग्री के लिए उपयोगी।
तालप्रकृतिखेतासरायसदर इमामबाड़ा, शाही पुल के पास शेर-की-मस्जिद, ईदगाह और पारंपरिक गलियों सहित पुराना शहर, जो मुख्य स्मारकों से आगे जौनपुर को दिखाता है।
पुराना शहरइमामबाड़ाविरासतजिले द्वारा सूचीबद्ध केराकत क्षेत्र का मंदिर मार्ग, जिसमें काली मंदिर और गोमतेश्वर महादेव शामिल हैं। छोटे तीर्थ स्थलों की कवरेज के लिए उपयोगी।
मंदिरकेराकतमहादेवमड़ियाहूं क्षेत्र का ओडीओपी ऊनी कालीन और दरी शिल्प क्लस्टर, जहां कारीगर हाथ से गांठदार और टफ्टेड फ्लोर कवरिंग बनाते हैं, जिनका निर्यात भी होता है।
ओडीओपीदरीकालीनकोई स्थानीय खोज साझा करनी है? बेहतर गाइड बनाने में हमारे संपादकों की मदद करें।
छिपी हुई जगह सुझाएँ →जौनपुर का ओडीओपी ऊनी कालीन या दरी है, खासकर मड़ियाहूं क्षेत्र के आसपास। जिला बेनीराम देवी प्रसाद इमरती, भोजपुरी-अवधी बाजार भोजन, कृषि, एग्रो-आधारित इकाइयों, कॉटन मिल और सतहरिया औद्योगिक क्षेत्र के लिए भी जाना जाता है।
जौनपुर का ओडीओपी उत्पाद ऊनी कालीन या दरी है, जिसे स्थानीय कारीगर हाथ से गांठदार और टफ्टेड रूप में बनाते हैं और जिला से बाहर भी बेचते हैं।
जौनपुर इमरती के लिए जाना जाता है, खासकर पुरानी बेनीराम देवी प्रसाद परंपरा जिसका स्थानीय भोजन चर्चा में उल्लेख होता है।
कचौरी, जलेबी, पूरी-सब्जी, चाय और सरल थाली विरासत यात्रियों, तीर्थ यात्रियों और बस-रेल यात्रियों के लिए उपयोगी पड़ाव हैं।
कृषि मुख्य आधार है, जबकि कॉटन मिल गतिविधि, एग्रो-आधारित इकाइयां और सतहरिया उद्योग स्थानीय अर्थव्यवस्था मूल्य जोड़ते हैं।
संपादकीय समीक्षा के बाद नई कहानियाँ और रील्स यहाँ दिखाई देंगी।
Open member field notes, quieter detours and thoughtful stories from the green side of India.
अक्टूबर से मार्च अटाला मस्जिद, शाही किला, शाही पुल, जामा मस्जिद, शीतला चौकिया धाम, गुजर ताल और कालीन क्लस्टर यात्रा के लिए अच्छा समय है। नवरात्र में शीतला चौकिया धाम में अधिक भीड़ रहती है।
मैदानी गर्मी तेज रहती है। स्मारक, शीतला चौकिया और बाजार सुबह या शाम देखें।
उमस और बारिश रहती है। यात्रा से पहले गोमती और बसुही किनारे निचले क्षेत्र, ग्रामीण सड़कें और ताल मार्ग जांचें।
विरासत भ्रमण, शाही पुल, शाही किला, मस्जिदों, मंदिरों, गुजर ताल और दरी शिल्प क्लस्टरों के लिए सबसे अच्छा मौसम।
वाराणसी एयरपोर्ट लगभग 40 किमी
जौनपुर सिटी और जौनपुर जंक्शन
जौनपुर शहर केंद्र में बस स्टैंड