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Take the scenic route · उत्तर प्रदेश

बदायूँ

सूफी संतों, जामा मस्जिद शम्सी, इखलास खान रोज़ा, शेखूपुर मकबरों, कछला गंगा और जरी-जरदोजी शिल्प वाला रोहिलखंड विरासत जिला।

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बदायूँ: पंचाल स्मृति, सल्तनत स्मारक और गंगा संस्कृति

बदायूँ को आधिकारिक रूप से सूफी संतों, औलिया, वली और पीरों की पवित्र भूमि बताया गया है। जिला स्रोत इसे पंचाल, बेदमूथ या बुद्धमऊ परंपरा, राजा बुद्ध, अशोक स्मृति, दिल्ली सल्तनत की सीमा चौकी, इल्तुतमिश और जामा मस्जिद शम्सी से जोड़ते हैं। कछला, ककोड़ा मेला, भगीरथ गुफा और जरी-जरदोजी जैसे जीवंत शिल्प इसे गंगा संस्कृति से जोड़ते हैं।

प्राचीन

पंचाल और बुद्धमऊ परंपरा

आधिकारिक स्रोत बदायूँ को पंचाल, बेदमूथ, बुद्धमऊ और राजा बुद्ध की परंपरा से जोड़ते हैं। अशोक स्मृति, वैदिक शिक्षा और सूरजकुंड स्थानीय इतिहास का हिस्सा हैं।

सल्तनत काल

इल्तुतमिश और जामा मस्जिद शम्सी

बदायूँ दिल्ली सल्तनत की महत्वपूर्ण सीमा चौकी बना। इल्तुतमिश और रुकनुद्दीन जामा मस्जिद शम्सी से जुड़े हैं, जो शहर का बड़ा मध्यकालीन स्मारक है।

मुगल काल

शेखूपुर और रोज़ा विरासत

मुगल काल के स्मारकों में इखलास खान का रोज़ा, परवर बानो खानम का मकबरा, शेखूपुर किला और मखदूमन-ए-जहां का मकबरा शामिल हैं।

जीवंत संस्कृति

गंगा मेला और शिल्प पहचान

ककोड़ा मेला, कछला गंगा, भगीरथ गुफा, सूफी दरगाहें और जरी-जरदोजी बदायूँ को मजबूत सांस्कृतिक और शिल्प जिला बनाते हैं।

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विरासत मस्जिद

जामा मस्जिद शम्सी बदायूँ

इल्तुतमिश द्वारा शुरू और रुकनुद्दीन के काल से जुड़ा प्रमुख सल्तनत कालीन स्मारक। यह पुराने बदायूँ की सबसे महत्वपूर्ण विरासतों में शामिल है।

मस्जिदसल्तनतविरासत
Ikhlas Khan Ka Roza in Budaun, Uttar Pradesh
मुगल मकबरा

इखलास खान का रोज़ा

1690 में नवाब इखलास खान की स्मृति में बना मुगलकालीन मकबरा। आधिकारिक पर्यटन इसे रोज़ा कहता है और गंगा दस्तावेज इसे संरक्षित स्मारक बताता है।

रोज़ामुगलएएसआई
मकबरा

परवर बानो खानम मकबरा शेखूपुर

मुमताज महल की बहन परवर बानो खानम का मकबरा, जो बदायूँ के शेखूपुर क्षेत्र में स्थित और आधिकारिक पर्यटन पेज में सूचीबद्ध है।

मकबरामुगलशेखूपुर
किला अवशेष

शेखूपुर किला अवशेष

शेखूपुर के फारूकी परिवार और मुगलकालीन जागीर इतिहास से जुड़े किले के अवशेष। परवर बानो मकबरा और शेखूपुर के अन्य मकबरों के साथ देखें।

किलाशेखूपुरमुगल
संरक्षित मकबरा

मखदूमन-ए-जहां मकबरा

शेखूपुर का एएसआई संरक्षित मकबरा, जो सुल्तान मुहम्मद शाह सैय्यद की पत्नी और अलाउद्दीन आलम शाह की माता मखदूमन-ए-जहां से जुड़ा है।

मकबरासैय्यदएएसआई
पवित्र गुफा

भगीरथ गुफा और कपिल मुनि आश्रम होडलपुर

कछला के पास पुरानी गंगा धारा से जुड़ा पवित्र स्थल, जिसे भगीरथ तपस्या, कपिल मुनि आश्रम, प्राचीन गुफा कक्ष और शिव पूजा से जोड़ा जाता है।

भगीरथगुफागंगा
गंगा घाट

कछला गंगा घाट

गंगा स्नान, नदी दृश्य, मेले और भगीरथ गुफा सहित आसपास के पवित्र क्षेत्र तक पहुंच का महत्वपूर्ण घाट मार्ग।

गंगाघाटतीर्थ
गंगा मेला

ककोड़ा गंगा मेला उझानी

उझानी परगना में कार्तिक पूर्णिमा का बड़ा गंगा मेला, जिसे मिनी कुंभ कहा जाता है। यहां गंगा स्नान, यज्ञ, व्यापार और ग्रामीण सांस्कृतिक जुटान होता है।

ककोड़ागंगा मेलाकार्तिक
शिल्प क्लस्टर

बदायूँ जरी-जरदोजी शिल्प क्लस्टर

बदायूँ की ओडीओपी शिल्प पहचान, जो बदायूँ, बिसौली और दातागंज तहसीलों में प्रमुख है। इसे स्थानीय रूप से करचोबी भी कहते हैं।

जरीजरदोजीओडीओपी
शिल्प मार्ग

खादी बुनाई और मूंज टोकरी शिल्प

इंटैक दस्तावेज बदायूँ की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में खादी बुनाई, टोकरी, बान और मूंज शिल्प का उल्लेख करता है।

खादीटोकरीशिल्प
ऐतिहासिक स्थल

सूरजकुंड वैदिक शिक्षा स्थल

स्थानीय इतिहास सूरजकुंड को बदायूँ की प्राचीन वैदिक शिक्षा स्मृति से जोड़ता है, जो प्राचीन इतिहास और शहर विरासत कवरेज के लिए उपयोगी है।

सूरजकुंडवैदिकइतिहास
कस्बा मार्ग

सहसवान पुराना कस्बा मार्ग

बदायूँ जिले का महत्वपूर्ण पुराना तहसील कस्बा, जो जिला विस्तार, बाजार, स्थानीय दरगाहों और बदायूँ शहर से बाहर रोहिलखंड कस्बाई जीवन को कवर करता है।

सहसवानकस्बाबाजार
आम रास्ते से थोड़ा अलग

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कुछ स्थानीय स्वाद चखें

स्थानीय भोजन

बदायूँ के भोजन में ककोड़ा मेले के स्नैक्स, कचौरी-जलेबी, चाट, पुराने शहर की बिरयानी-कबाब, गन्ने का गुड़, ग्रामीण मिठाइयां और गंगा क्षेत्र का मौसमी भोजन शामिल करें।

ककोड़ा गंगा मेला और उझानी मार्ग

ककोड़ा मेला स्नैक्स

कार्तिक गंगा स्नान के दौरान मौसमी मेला भोजन, प्रसाद, चाय, कचौरी, मिठाई और ग्रामीण बाजार स्नैक्स।

पुराना शहर और बाजार गलियां

पुराना बदायूँ कचौरी जलेबी और चाट

पुराने बदायूँ बाजारों और स्मारक मार्गों के आसपास यात्रियों के लिए उपयोगी नाश्ता और शाम का स्नैक ट्रेल।

पुराने शहर की भोजन गलियां

रोहिलखंड बिरयानी और कबाब

पुराने शहर का नॉन-वेज फूड ट्रेल, जो जामा मस्जिद, रोज़ा और सूफी विरासत कवरेज के साथ अच्छा मेल खाता है।

दातागंज, बिल्सी, सहसवान और ग्रामीण बाजार

गुड़ और ग्रामीण मिठाइयां

गन्ना क्षेत्र के स्वाद, जिनमें गुड़, रेवड़ी, मौसमी मिठाइयां और जिला कस्बों के मेला स्नैक्स शामिल हैं।

एक दूसरे यात्री की नज़र से

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Before you set off.

अक्टूबर से मार्च जामा मस्जिद, रोज़ा, शेखूपुर, कछला गंगा, ककोड़ा मेला और जरी-जरदोजी खरीदारी के लिए अच्छा समय है। कार्तिक पूर्णिमा ककोड़ा गंगा स्नान के लिए खास है।

मार्च से जून · 32-43 C

गर्मी

मैदानी गर्मी बहुत तेज रहती है। स्मारक, शिल्प गलियां और घाट सुबह या शाम देखें।

जुलाई से सितंबर · 27-35 C

मानसून

उमस और बारिश रहती है। गंगा क्षेत्र हरा दिखता है, लेकिन घाट, मेले और ग्रामीण रास्तों में सावधानी चाहिए।

अक्टूबर से फरवरी · 14-26 C

सर्दी

जामा मस्जिद, रोज़ा, शेखूपुर, कछला, ककोड़ा मेला और जरदोजी खरीदारी के लिए सबसे अच्छा मौसम।

हवाई मार्ग

निकटतम एयरपोर्ट विकल्प

    रेल मार्ग

    बदायूँ रेलवे स्टेशन

      सड़क मार्ग

      बरेली, मथुरा, मुरादाबाद और गंगा मार्ग