त्सुगलाखांग दलाई लामा मंदिर परिसर
मैक्लोडगंज का मुख्य आध्यात्मिक केंद्र और परम पावन दलाई लामा से जुड़ा सार्वजनिक मंदिर परिसर, जहां प्रार्थना चक्र, बौद्ध शिक्षाएं और तिब्बती तीर्थ परंपरा मिलती है।
दलाई लामामंदिरतिब्बतीधौलाधार पर्वत दृश्य, मैक्लोडगंज संस्कृति, मठ, कैफे, क्रिकेट, चाय बागान और कांगड़ा घाटी के आसान डे-ट्रिप।
Make room for धर्मशाला in your next adventure.
Open trip planner →Know something this guide is missing?Share a hidden place, correction, accessibility detail or seasonal change with our editorial team.
धर्मशाला हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले का प्रमुख पहाड़ी गंतव्य है। यह ऐतिहासिक कांगड़ा घाटी से विकसित हुआ और बाद में ब्रिटिश हिल स्टेशन तथा छावनी के रूप में महत्वपूर्ण बना। 1959 के बाद मैक्लोडगंज परम पावन 14वें दलाई लामा और तिब्बती निर्वासित समुदाय का केंद्र बना। आज धर्मशाला धौलाधार दृश्यों, मठों, हिमालयी ट्रेक, कांगड़ा कला, क्रिकेट, चाय बागानों और हिमाचली-तिब्बती भोजन संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है।
धर्मशाला व्यापक कांगड़ा घाटी का हिस्सा है, जो ऐतिहासिक रूप से त्रिगर्त, कटोच शासन, कांगड़ा किला परंपरा, मंदिरों, चित्रकला, संगीत और हिमालयी व्यापार मार्गों से जुड़ी रही है।
उन्नीसवीं सदी में धर्मशाला ब्रिटिश हिल स्टेशन और सैन्य छावनी के रूप में विकसित हुआ। मैक्लोडगंज, फोरसाइथगंज और सेंट जॉन इन द वाइल्डरनेस उस काल की स्मृति संभाले हुए हैं।
1905 के कांगड़ा भूकंप ने पूरे क्षेत्र में बड़ा नुकसान किया। धर्मशाला, मैक्लोडगंज और पुराने कांगड़ा बसाव को समझने में यह घटना महत्वपूर्ण है।
1959 के बाद मैक्लोडगंज परम पावन 14वें दलाई लामा का निवास और तिब्बती संस्कृति, धर्म तथा अध्ययन का महत्वपूर्ण केंद्र बना।
आधुनिक धर्मशाला मठों, ट्रेक, एचपीसीए क्रिकेट स्टेडियम, कांगड़ा कला, चाय बागानों, धर्मशाला स्काईवे और तपोवन विधानसभा को साथ लेकर सालभर का गंतव्य बनता है।
मैक्लोडगंज का मुख्य आध्यात्मिक केंद्र और परम पावन दलाई लामा से जुड़ा सार्वजनिक मंदिर परिसर, जहां प्रार्थना चक्र, बौद्ध शिक्षाएं और तिब्बती तीर्थ परंपरा मिलती है।
दलाई लामामंदिरतिब्बतीमैक्लोडगंज का महत्वपूर्ण तिब्बती बौद्ध मठ, जो दलाई लामा मंदिर क्षेत्र के मठ अध्ययन, अनुष्ठान, वाद-विवाद और प्रार्थना जीवन से जुड़ा है।
मठबौद्धमैक्लोडगंजमैक्लोडगंज के पास तिब्बती इतिहास, निर्वासन स्मृति, अभिलेख, पुस्तकों, तस्वीरों और अध्ययन सामग्री का महत्वपूर्ण सांस्कृतिक ठिकाना।
संग्रहालयतिब्बतसंस्कृतिकैफे, तिब्बती हस्तशिल्प, थांका कला, ऊनी वस्त्र, प्रार्थना झंडे, किताबों, स्ट्रीट फूड और मंदिर परिसर तक पहुंच के लिए मुख्य यात्री मार्ग।
बाजारकैफेतिब्बती शिल्पमैक्लोडगंज के पास लोकप्रिय मार्ग, जहां प्राचीन भागसुनाग मंदिर, पवित्र कुंड, कैफे और भागसू जलप्रपात तक छोटी पैदल यात्रा मिलती है।
भागसूमंदिरजलप्रपातमैक्लोडगंज, धर्मकोट या गालू दिशा से धौलाधार का प्रसिद्ध डे-ट्रेक, जो कांगड़ा घाटी दृश्य, पर्वतीय मैदान और नियमों के अनुसार कैंपिंग क्षेत्र के लिए जाना जाता है।
ट्रेकधौलाधारएडवेंचरमैक्लोडगंज के ऊपर पहाड़ी गांव और ट्रेक बेस, जहां कैफे, होमस्टे, योग स्टे, गालू देवी मार्ग और त्रिउंड की पहुंच मिलती है।
धर्मकोटकैफेट्रेक बेसमैक्लोडगंज के ऊपर धौलाधार और कांगड़ा घाटी का साफ दृश्य बिंदु, जो सूर्यास्त, फोटोग्राफी और परिवारिक यात्रा के लिए लोकप्रिय है।
नड्डीदृश्य बिंदुसूर्यास्तनड्डी और मैक्लोडगंज के पास देवदार से घिरी छोटी झील, जो स्थानीय शिव मंदिर और छोटी सुंदर यात्रा के लिए जानी जाती है।
झीलनड्डीशिव मंदिरफोरसाइथगंज और मैक्लोडगंज के बीच देवदार जंगल से घिरा ऐतिहासिक नियो-गॉथिक चर्च, जो औपनिवेशिक धर्मशाला स्मृति से जुड़ा है।
चर्चऔपनिवेशिकदेवदारधौलाधार पृष्ठभूमि वाला ऊंचाई पर स्थित क्रिकेट स्टेडियम, धर्मशाला का सबसे ज्यादा photographed आधुनिक स्थल और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट venue है।
क्रिकेटस्टेडियमधौलाधारधर्मशाला में हिमाचल प्रदेश के सैनिकों को समर्पित स्मारक, जो देशभक्ति, शिक्षा और परिवारिक यात्रा के लिए उपयुक्त है।
युद्ध स्मारकदेशभक्तिसंग्रहालयकांगड़ा घाटी की कला, मिनिएचर पेंटिंग, शिल्प, मूर्तिकला, परिधान, आभूषण और सांस्कृतिक स्मृति पर केंद्रित संग्रहालय।
संग्रहालयकांगड़ा कलासंस्कृतिसिद्धपुर के पास प्रमुख तिब्बती कला और संस्कृति संस्थान, जो कार्यशालाओं, बगीचों, थांका पेंटिंग, लकड़ी कार्य, धातु शिल्प और डॉल म्यूजियम के लिए प्रसिद्ध है।
नोरबुलिंग्कातिब्बती कलाशिल्पसिद्धबाड़ी और धर्मशाला के पास महत्वपूर्ण मठ, जो तांत्रिक बौद्ध साधना, प्रार्थना कक्ष और शांत धौलाधार वातावरण के लिए जाना जाता है।
ग्यूटोमठसिद्धबाड़ीखनियारा और धौलाधार तलहटी के पास पुराना शिव मंदिर, जो स्थानीय तीर्थ और प्राकृतिक मार्ग कवरेज के लिए उपयोगी है।
शिवखनियारामंदिरधर्मशाला के ऊपर स्थित स्थानीय देवी मंदिर, जो शक्ति पूजा और पहाड़ी दृश्यों से जुड़ा है।
देवीमंदिरदृश्यतपोवन स्थित विधानसभा परिसर, जो धर्मशाला की शीतकालीन राजधानी भूमिका से जुड़ा है और नागरिक पर्यटन कवरेज के लिए उपयोगी है।
तपोवनविधानसभाशीतकालीन राजधानीधर्मशाला और आसपास की कांगड़ा घाटी ढलानों के चाय बागान, जो टी वॉक, फोटोग्राफी और कांगड़ा चाय खरीदारी के लिए उपयोगी हैं।
चायकांगड़ाबागानलोअर धर्मशाला को मैक्लोडगंज से जोड़ने वाला रोपवे, जो सड़क यात्रा समय घटाता है और घाटी व पहाड़ों के हवाई दृश्य देता है।
रोपवेमैक्लोडगंजदृश्यकांगड़ा घाटी का प्रमुख ऐतिहासिक किला, जिसे धर्मशाला से आधे दिन की हेरिटेज यात्रा में जोड़ा जा सकता है।
किलाकांगड़ाडे-ट्रिपकांगड़ा जिले का आकर्षक रॉक-कट मंदिर समूह, जो मैक्लोडगंज से आगे स्थापत्य और पौराणिक अनुभव चाहने वालों के लिए अच्छा है।
रॉक कटमंदिरस्थापत्यधर्मशाला के पास प्रमुख शक्ति मंदिर, जिसे अक्सर पालमपुर या कांगड़ा घाटी ड्राइव के साथ देखा जाता है।
मंदिरशक्ति पीठकांगड़ाचाय बागान, कैफे, धौलाधार दृश्य और शांत ग्रामीण ड्राइव के लिए कांगड़ा घाटी का आरामदायक विस्तार।
चायपालमपुरदृश्यकोई स्थानीय खोज साझा करनी है? बेहतर गाइड बनाने में हमारे संपादकों की मदद करें।
छिपी हुई जगह सुझाएँ →धर्मशाला के भोजन में कांगड़ी धाम, तिब्बती मोमोज, थुकपा, बटर टी, टिंगमो, हिमाचली मदरा, सिड्डू, कांगड़ा चाय और मैक्लोडगंज, भागसू व धर्मकोट की कैफे संस्कृति शामिल करनी चाहिए।
पत्तल पर परोसा जाने वाला पारंपरिक कांगड़ा भोज, जिसमें मदरा, दाल, खट्टा, चावल और मीठे व्यंजन शामिल होते हैं।
धर्मशाला का सबसे प्रमुख तिब्बती फूड ट्रेल, जिसमें स्टीम मोमोज, सूप नूडल्स, टिंगमो और चिली सॉस मिलते हैं।
बटर टी, तिब्बती ब्रेड, टिंगमो, याक चीज शैली स्नैक्स, केक और बेकरी आइटम मैक्लोडगंज कैफे ट्रेल को अलग बनाते हैं।
मदरा, सिड्डू, राजमा, चावल और घी वाले हिमाचली व्यंजन कैफे संस्कृति से आगे स्थानीय पहाड़ी भोजन की गहराई देते हैं।
कांगड़ा चाय धर्मशाला की खरीदारी और कैफे सामग्री के लिए जरूरी है, खासकर चाय बागानों और स्थानीय बाजारों के पास।
संपादकीय समीक्षा के बाद नई कहानियाँ और रील्स यहाँ दिखाई देंगी।
Open member field notes, quieter detours and thoughtful stories from the green side of India.
मार्च से जून दर्शनीय स्थलों और कैफे के लिए अच्छा है; सितंबर से नवंबर बारिश के बाद साफ पहाड़ी दृश्य देता है। त्रिउंड, नड्डी और ऊंचे मार्गों पर जाने से पहले मौसम जरूर जांचें, खासकर सर्दी और मानसून में।
दर्शन, मठ, कैफे, स्थानीय बाजार, नड्डी दृश्य और निचली ऊंचाई की सैर के लिए अच्छा समय। मैदानी क्षेत्रों की तुलना में दिन सुहावने रहते हैं।
कांगड़ा में भारी बारिश का मौसम। झरने सक्रिय रहते हैं, लेकिन भूस्खलन, फिसलन भरे ट्रेल और सड़क देरी संभव है।
साफ आसमान, धौलाधार के अच्छे दृश्य और मंदिर सैर, कैफे, संग्रहालय तथा फोटोग्राफी के लिए आरामदायक मौसम।
ठंडा मौसम, खासकर मैक्लोडगंज, नड्डी और धर्मकोट में। ऊंचे मार्गों पर बर्फ संभव है, इसलिए त्रिउंड और पर्वतीय रास्तों की स्थिति जांचें।
कांगड़ा एयरपोर्ट गगल
पठानकोट और कांगड़ा रेल पहुंच
एचआरटीसी बसें, टैक्सी और पहाड़ी सड़कें
स्काईवे, टैक्सी और पैदल मार्ग