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Take the scenic route · उत्तर प्रदेश

संत कबीर नगर

मगहर, बखिरा आर्द्रभूमि, पीतल शिल्प, हैंडलूम और खलीलाबाद विरासत वाला कबीर निर्वाण क्षेत्र

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कबीर, खलीलाबाद और बस्ती मंडल का जिला

संत कबीर नगर 5 सितंबर 1997 को बनाया गया और इसका नाम संत कबीर दास के नाम पर रखा गया, जिनकी कर्मभूमि और अंतिम स्मृति मगहर से जुड़ी है। जिले में खलीलाबाद, मेंहदावल और घनघटा तहसीलें हैं, और यह पुराने बस्ती तथा सिद्धार्थनगर प्रशासनिक क्षेत्रों के हिस्सों से बना।

15वीं-16वीं सदी

संत कबीर और मगहर

मगहर वह स्थान है जहां स्थानीय परंपरा के अनुसार संत कबीर ने जनवरी 1518, माघ शुक्ल एकादशी को शरीर छोड़ा। हिंदू और मुस्लिम अनुयायियों ने यहां समाधि और मजार साथ-साथ बनाई, जिससे यह साझा आस्था का दुर्लभ विरासत स्थल बनता है।

मुगल काल

खलीलाबाद और काजी खलील-उर-रहमान

खलीलाबाद का नाम काजी खलील-उर-रहमान से जुड़ता है, जिन्हें जिला परंपरा मुगलकालीन प्रशासन और स्थानीय संघर्ष से जोड़ती है। बाद में बरदहिया बाजार हैंडलूम कपड़ा व्यापार के लिए प्रसिद्ध हुआ।

1997

संत कबीर नगर जिला निर्माण

यह जिला 5 सितंबर 1997 को पुराने बस्ती की खलीलाबाद तहसील, बस्ती तहसील के गांवों और सिद्धार्थनगर के सांथा ब्लॉक गांवों से बनाया गया। खलीलाबाद इसका प्रशासनिक केंद्र बना।

वर्तमान

पीतल शिल्प, हैंडलूम और आर्द्रभूमि पर्यटन

आज जिले में मगहर का कबीर तीर्थ, बखिरा मोती झील पक्षी दर्शन, बखिरा पीतल शिल्प, होजरी और हैंडलूम कपड़ा क्षेत्र साथ मिलते हैं। इससे तीर्थ, शिल्प, प्रकृति और बाजार पर्यटन को आधार मिलता है।

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वे जगहें जो याद रहेंगी।

कबीर विरासत

मगहर संत कबीर चौरा

मुख्य संत कबीर विरासत स्थल, जहां माना जाता है कि कबीर ने 1518 में शरीर छोड़ा। यह जिला पहचान का केंद्र है और मकर संक्रांति तथा कबीर से जुड़े कार्यक्रमों में यात्रियों को आकर्षित करता है।

कबीरमगहरविरासत
साझा आस्था स्थल

कबीर समाधि और मजार परिसर

मगहर में समाधि और मजार साथ-साथ स्थित हैं, जो संत कबीर के प्रति हिंदू और मुस्लिम अनुयायियों के साझा सम्मान को दिखाते हैं।

कबीरसमाधिमजार
आर्द्रभूमि अभयारण्य

बखिरा पक्षी अभयारण्य और मोती झील

पूर्वी उत्तर प्रदेश की बड़ी प्राकृतिक बाढ़ मैदान आर्द्रभूमि, जिसे 1980 में अभयारण्य बनाया गया। यह सर्दियों में प्रवासी जलपक्षियों और निवासी पक्षियों के प्रजनन को सहारा देती है।

आर्द्रभूमिपक्षी दर्शनबखिरा
वन प्रकृति

बेलहर वन क्षेत्र

जिले द्वारा मनोरंजन और वन्यजीव जागरूकता के लिए सूचीबद्ध वन क्षेत्र, जहां मोर, नीलगाय, हिरण, अजगर आदि जीवों का स्थानीय उल्लेख मिलता है।

वनप्रकृतिबेलहर
प्राचीन शिव मंदिर

तामेश्वर नाथ मंदिर

स्थानीय मान्यता में कुंती और पांडवकालीन पूजा से जुड़ा प्राचीन मंदिर। यह संत कबीर नगर का महत्वपूर्ण छोटा तीर्थ स्थल है।

मंदिरशिवतामेश्वर नाथ
शहर मंदिर

समय माता मंदिर, खलीलाबाद

संत कबीर नगर के सबसे पुराने और लोकप्रिय मंदिरों में से एक, जो खलीलाबाद शहर के बीच कोतवाली पुलिस स्टेशन के पास स्थित है।

मंदिरखलीलाबाददेवी
खलीलाबाद विरासत

काजी खलील-उर-रहमान का किला

काजी खलील-उर-रहमान और मुगलकालीन स्थानीय प्रशासन से जुड़ा ऐतिहासिक खलीलाबाद संदर्भ। यह खलीलाबाद को केवल परिवहन नगर से आगे विरासत महत्व देता है।

विरासतखलीलाबादकिला
हैंडलूम बाजार

बरदहिया बाजार हैंडलूम मार्केट

हैंडलूम कपड़े के लिए प्रसिद्ध जिला बाजार। खलीलाबाद के आसपास खरीदारी, शिल्प, वस्त्र और स्थानीय अर्थव्यवस्था सामग्री के लिए उपयोगी।

हैंडलूमबाजारवस्त्र
ओडीओपी शिल्प

बखिरा पीतल शिल्प क्लस्टर

कटोरे, थाली, गिलास, बर्तन, जग, फूलदान और घंटियां बनाने वाला प्राचीन पीतल शिल्प क्लस्टर। यह जिले की ओडीओपी पहचान है।

ओडीओपीपीतल शिल्पबखिरा
वस्त्र क्लस्टर

अमरडोभा-नंदौर-लेदुआ महुआ हैंडलूम क्षेत्र

जिले के हैंडीक्राफ्ट पेज में अमरडोभा, बखिरा, मगहर, नंदौर और लेदुआ महुआ को कपड़ा उद्योग क्षेत्र बताया गया है जहां सूती हस्तनिर्मित कपड़ा बनता है।

हैंडलूमसूतीशिल्प
शहर आधार

खलीलाबाद रेलवे और शहर बाजार

लखनऊ-गोरखपुर ब्रॉड गेज लाइन पर बस्ती और गोरखपुर के बीच जिला मुख्यालय और रेल पड़ाव। यह मगहर, बखिरा और जिला सेवाओं के लिए व्यावहारिक आधार है।

रेलशहरखलीलाबाद
आम रास्ते से थोड़ा अलग

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कुछ स्थानीय स्वाद चखें

स्थानीय भोजन और उत्पाद

संत कबीर नगर ओडीओपी में पीतल शिल्प, खासकर बखिरा ब्रास क्लस्टर के लिए जाना जाता है। जिले में होजरी और अमरडोभा, बखिरा, मगहर, नंदौर और लेदुआ महुआ जैसे हैंडलूम कपड़ा क्षेत्र भी हैं।

बखिरा शिल्प क्लस्टर

बखिरा पीतल शिल्प उत्पाद

ओडीओपी पीतल शिल्प में कटोरे, थाली, गिलास, बर्तन, जग, फूलदान और घंटियां शामिल हैं। यह जिले की सबसे मजबूत स्थानीय उत्पाद पहचान है।

अमरडोभा, बखिरा, मगहर, नंदौर, लेदुआ महुआ

हैंडलूम सूती कपड़ा

सूती हस्तनिर्मित कपड़ा और हैंडलूम बाजार संत कबीर नगर को तीर्थ से आगे वस्त्र खरीदारी पहचान देते हैं।

ग्रामीण और खलीलाबाद बाजार क्षेत्र

होजरी उत्पाद

जिला बच्चों के कपड़े, टी-शर्ट और गर्मी के वस्त्र जैसे किफायती होजरी उत्पादों के लिए जाना जाता है।

मगहर और खलीलाबाद

मगहर तीर्थ भोजन

संत कबीर चौरा और आसपास के बाजारों में आने वालों के लिए चाय, मिठाई, पूरी-सब्जी, कचौरी और सरल थाली उपयोगी पड़ाव हैं।

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Before you set off.

अक्टूबर से मार्च मगहर संत कबीर चौरा, बखिरा मोती झील, तामेश्वर नाथ और हैंडलूम-पीतल बाजारों के लिए अच्छा समय है। जनवरी कबीर से जुड़े मगहर कार्यक्रमों और मकर संक्रांति यात्राओं के लिए महत्वपूर्ण है।

अप्रैल से जून · 33-43 C

गर्मी

पूर्वी मैदानी गर्मी तेज रहती है। मगहर, तामेश्वर नाथ और खलीलाबाद बाजार सुबह या शाम देखें।

जुलाई से सितंबर · 27-34 C

मानसून

उमस और बारिश रहती है। बखिरा आर्द्रभूमि सुंदर दिखती है, लेकिन झील और वन यात्रा से पहले ग्रामीण सड़कों की स्थिति जांचें।

अक्टूबर से मार्च · 18-29 C

सर्दी

मगहर कबीर चौरा, बखिरा पक्षी दर्शन, हैंडलूम बाजार और पीतल शिल्प यात्रा के लिए सबसे अच्छा मौसम।

हवाई मार्ग

गोरखपुर एयरपोर्ट पहुंच

    रेल मार्ग

    लखनऊ-गोरखपुर लाइन पर खलीलाबाद

      सड़क मार्ग

      एनएच-28 और स्थानीय जिला सड़कें