डालमऊ गंगा घाट और ऐतिहासिक नगर
गंगा तट का प्राचीन ऐतिहासिक नगर, जहां राजा दल किला, बड़ा मठ, महेश गिरी मठ, निराला स्मारक, एब्राहिम शर्की कुआं, नवाब शुजा-उद-दौला महल और आल्हा-ऊदल बैठक आधिकारिक रूप से दर्ज हैं।
गंगाडालमऊविरासतअवध इतिहास, डालमऊ गंगा घाट, समसपुर पक्षी विहार, मुंशीगंज किसान स्मारक और वुड वर्क शिल्प
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रायबरेली जिला 1858 में बना और इसका नाम मुख्यालय नगर से जुड़ा है। जिला इतिहास इसे भर बसावट, अवध, राणा बेनी माधव सिंह, 1920-21 किसान आंदोलन, मुंशीगंज गोलीकांड, डालमऊ गंगा विरासत और वुड वर्क शिल्प से जोड़ता है।
रायबरेली जिला 1858 में बनाया गया। आधिकारिक इतिहास मुख्यालय नगर को भर बसावट और पुराने नाम भरौली या बरौली से जोड़ता है।
जिला अवध इतिहास का हिस्सा है और राणा बेनी माधव सिंह को प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के अमर नायक के रूप में याद करता है। बाद में यह राष्ट्रीय आंदोलन की महत्वपूर्ण भूमि बना।
बाबा रामचंद्र ने 1920 में जिले में किसान सभा गतिविधि शुरू की। 7 जनवरी 1921 का मुंशीगंज गोलीकांड शहीद स्मारक और शहीद दिवस के रूप में याद किया जाता है।
ओडीओपी रायबरेली को वुड वर्क के लिए दर्ज करता है, जिसमें दरवाजे, घरेलू वस्तुएं, लकड़ी के खिलौने, कलाकृतियां और नक्काशीदार वस्तुएं स्थानीय और आसपास के जिलों में बिकती हैं।
गंगा तट का प्राचीन ऐतिहासिक नगर, जहां राजा दल किला, बड़ा मठ, महेश गिरी मठ, निराला स्मारक, एब्राहिम शर्की कुआं, नवाब शुजा-उद-दौला महल और आल्हा-ऊदल बैठक आधिकारिक रूप से दर्ज हैं।
गंगाडालमऊविरासतराजा दल किला डालमऊ के प्रमुख स्थलों में दर्ज है और गंगा किनारे नगर के पुराने इतिहास को दिखाता है।
किलाडालमऊराजा दलबड़ा मठ और महेश गिरी मठ डालमऊ के आधिकारिक धार्मिक विरासत स्थल हैं।
मठडालमऊधार्मिकनिराला स्मारक संस्थान डालमऊ के प्रमुख स्थलों में दर्ज है और गंगा नगर में साहित्यिक स्मृति जोड़ता है।
निरालाडालमऊसाहित्यएब्राहिम शर्की द्वारा बनाया गया कुआं और नवाब शुजा-उद-दौला का महल डालमऊ के आधिकारिक ऐतिहासिक बिंदु हैं।
डालमऊएब्राहिम शर्कीशुजा उद दौलाआल्हा-ऊदल बैठक और डालमऊ पंप कैनाल आधिकारिक डालमऊ सूची में हैं और लोक स्मृति, नदी तथा सिंचाई विरासत को जोड़ते हैं।
आल्हा ऊदलडालमऊपंप कैनालरोहनिया ब्लॉक का पक्षी विहार, 1987 में स्थापित और लगभग 799.371 हेक्टेयर में फैला। नवंबर से मार्च अच्छा समय है और 250 से अधिक पक्षी प्रजातियां देखी जा सकती हैं।
पक्षी विहारसमसपुरवन्यजीव1986 में पारिस्थितिक संतुलन के लिए बना बॉटनिकल गार्डन, जिसमें औषधीय, सांस्कृतिक, आर्थिक, बल्बस, रॉक, रोज, एक्वाटिक गार्डन और ग्रीन हाउस शामिल हैं।
बॉटनिकल गार्डनइंदिरा गांधीसई नदीरायबरेली शहर के बाहरी भाग का पुल, जहां शारदा नहर सई नदी को एक्वाडक्ट डक्ट से पार करती है।
बेहत पुलएक्वाडक्टसई नदी7 जनवरी 1921 का मुंशीगंज गोलीकांड किसान आंदोलन से जुड़ा है और जिला इतिहास में शहीद स्मारक के रूप में याद किया गया है।
किसान आंदोलनमुंशीगंजशहीद स्मारकओडीओपी जिले में लकड़ी के दरवाजे, घरेलू सामान, लकड़ी के खिलौने, कलाकृतियां और नक्काशीदार वस्तुओं का उल्लेख करता है।
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छिपी हुई जगह सुझाएँ →भोजन में अवध का सरल स्वाद है: कचौड़ी-सब्जी, जलेबी, समोसा-चाय, गंगा घाट प्रसाद, दाल-भात, रोटी-सब्जी, गुड़-तिल मिठाई और बाजारों की नमकीन।
गंगा घाट दर्शन के बाद प्रसाद, चाय, समोसा, पकौड़ी और मौसमी मिठाइयां छोटे पड़ाव के लिए उपयोगी हैं।
शहर और कस्बों में कचौड़ी-सब्जी, जलेबी और चाय आसान नाश्ता हैं।
दाल-भात, रोटी-सब्जी, अचार और रायता सड़क यात्रा और पक्षी विहार मार्ग में भरोसेमंद भोजन हैं।
पक्षी विहार मार्ग पर चाय, नमकीन, फल, पानी और हल्का पैक भोजन उपयोगी है क्योंकि स्थान शहर से दूर है।
मौसमी गुड़, तिल मिठाई, पेड़ा, नमकीन और स्थानीय स्नैक्स यात्रा में साथ ले जाने योग्य हैं।
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नवंबर से मार्च श्रेष्ठ है। समसपुर पक्षी विहार के लिए आधिकारिक पृष्ठ नवंबर से मार्च को अच्छा समय बताता है। डालमऊ और गंगा क्षेत्र के लिए सर्दी तथा स्नान पर्व महत्वपूर्ण हैं।
डालमऊ, समसपुर पक्षी विहार, इंदिरा गार्डन, बेहत पुल, बाजार और वुड वर्क क्लस्टर के लिए श्रेष्ठ।
दोपहर गर्म रहती है। गंगा घाट, पक्षी दर्शन और खुले स्मारक सुबह या शाम रखें।
सई और गंगा क्षेत्र हरे हो जाते हैं, पर नदी किनारे, ग्रामीण सड़कें और पक्षी विहार मार्ग गीले या कीचड़ भरे हो सकते हैं।
समसपुर में प्रवासी पक्षियों, डालमऊ गंगा यात्रा और स्थानीय मेले या स्नान दिनों के लिए अच्छा।
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