वासुदेव मंदिर और तुलसी पार्क
अमरोहा का प्रमुख आधिकारिक धार्मिक स्थल, जिसे महाभारत स्मृति, बड़े तालाब, बजरंगबली प्रतिमा और 12 ज्योतिर्लिंग पूजा से जोड़ा जाता है।
मंदिरमहाभारतअमरोहाआम, ढोलक, गंगा मेला और सूफी विरासत वाला जिला, जिसमें वासुदेव मंदिर, शाह विलायत, तिगरी, गजरौला और अमरोहा पुराना शहर प्रमुख हैं।
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अप्रैल 1997 में अमरोहा को मुरादाबाद से अलग जिला बनाया गया और बाद में ज्योतिबा फुले नगर से नाम बदलकर अमरोहा किया गया। आधिकारिक इतिहास इस क्षेत्र को उत्तर पंचाल, राजपूत शासन, मुगल काल के संभल सरकार, अवध और ब्रिटिश काल से जोड़ता है। जिला ढोलक शिल्प, आम, गंगा संस्कृति, सूफी दरगाहों और पुराने शहर की विरासत के लिए जाना जाता है।
आधिकारिक इतिहास वर्तमान जिला क्षेत्र को उत्तर पंचाल और अमरोहा क्षेत्र में बंसी वंश के राजा अमरजोध की परंपरा से जोड़ता है।
मुगल काल में यह क्षेत्र दिल्ली सूबा के संभल सरकार का हिस्सा रहा। बाद में रोहिल्ला, मराठा और अवध प्रभाव से गुजरकर 1801 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के अधीन आया।
अप्रैल 1997 में मुरादाबाद की तहसीलों से यह जिला बना। पहले इसका नाम ज्योतिबा फुले नगर था और 2012 में अमरोहा नाम हुआ।
अमरोहा ढोलक निर्माण, आम की किस्मों, गंगा नदी क्षेत्र, तिगरी मेले, सूफी दरगाहों और पुराने हिंदू तीर्थ स्थलों के लिए जाना जाता है।
अमरोहा का प्रमुख आधिकारिक धार्मिक स्थल, जिसे महाभारत स्मृति, बड़े तालाब, बजरंगबली प्रतिमा और 12 ज्योतिर्लिंग पूजा से जोड़ा जाता है।
मंदिरमहाभारतअमरोहाडेनिशमंदान स्थित सैयद हुसैन शरफुद्दीन शाह विलायत की दरगाह, अमरोहा के मुख्य पर्यटन स्थलों में शामिल और सालाना उर्स के लिए प्रसिद्ध।
दरगाहसूफीउर्सकार्तिक पूर्णिमा पर तिगरी गांव के गंगा तट पर लगने वाला बड़ा धार्मिक और सांस्कृतिक मेला, जहां स्नान, दीपदान, गंगा आरती और ग्रामीण व्यापार होता है।
गंगामेलाकार्तिक पूर्णिमाअमरोहा की ऐतिहासिक बावली, जो पुराने जल स्थापत्य और स्थानीय सांस्कृतिक स्मृति के लिए महत्वपूर्ण है।
बावलीऐतिहासिककुआंआधिकारिक स्थल सूची में शामिल नसीरुद्दीन साहिब की मजार, अमरोहा पुराने शहर के धार्मिक विरासत सर्किट का हिस्सा है।
मजारपुराना शहरधार्मिकआधिकारिक अमरोहा स्थल सूची में शामिल दरगाह भूरे शाह, सूफी विरासत और पुराने शहर की आस्था यात्रा के लिए उपयोगी है।
दरगाहसूफीविरासतओडीओपी में अमरोहा को वाद्ययंत्रों के लिए बढ़ावा दिया गया है। ढोलक निर्माण यहां की वास्तविक शिल्प पहचान है, जिसमें लकड़ी, चमड़ा और स्थानीय कारीगरी शामिल है।
ढोलकओडीओपीशिल्पजिले की पहचान आम से जुड़ी है, और प्राकृतिक विरासत दस्तावेज में लंगड़ा तथा दशहरी किस्मों का उल्लेख है। मौसमी बाग और फूड पर्यटन के लिए उपयोगी।
आमबागभोजनदिल्ली-लखनऊ हाईवे पर स्थित गजरौला महत्वपूर्ण औद्योगिक शहर और तिगरी, धनौरा तथा अमरोहा पहुंच का उपयोगी ठहराव है।
गजरौलाउद्योगहाईवेगंगा प्राकृतिक विरासत दस्तावेज में मटेना अहतमाली सहित अमरोहा गंगा क्षेत्र के नदी दृश्य, बाढ़ मैदान वनस्पति, आर्द्रभूमि, मछलियां, पक्षी और छोटी नावों का उल्लेख है।
गंगाप्रकृतिआर्द्रभूमिहसनपुर तहसील मार्ग पुराने शहर और हाईवे क्षेत्र से बाहर गन्ना खेतों, गांव बाजारों और ग्रामीण अमरोहा को कवर करता है।
हसनपुरग्रामीणगन्नादिल्ली-मुरादाबाद रेल लाइन पर मुख्य पहुंच, जो पुराने अमरोहा, शाह विलायत, वासुदेव मंदिर और ढोलक बाजार यात्रियों के लिए उपयोगी है।
रेलवेदिल्ली मुरादाबादपहुंचकोई स्थानीय खोज साझा करनी है? बेहतर गाइड बनाने में हमारे संपादकों की मदद करें।
छिपी हुई जगह सुझाएँ →अमरोहा आम और मछली से जुड़ा माना जाता है, खासकर शहर के नाम की आम और रोहू वाली स्मृति से। यात्रियों के लिए गन्ने का गुड़, बाजार स्नैक्स, बिरयानी, कबाब और मौसमी मिठाइयां भी उपयोगी हैं।
लंगड़ा और दशहरी आम की पहचान गर्मियों के भोजन और बागान पर्यटन के लिए उपयोगी है।
शहर का नाम आम और रोहू से लोकप्रिय रूप से जोड़ा जाता है, इसलिए मछली और नदी भोजन का कवरेज जरूरी है।
गन्ना खेत और ग्रामीण मंडियां गुड़, रेवड़ी और सर्दियों की मिठाइयों को फूड ट्रेल के लिए उपयोगी बनाती हैं।
पुराने शहर, दरगाह मार्गों और शाम के बाजार भोजन के लिए उपयोगी नॉन-वेज ट्रेल।
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अक्टूबर से मार्च पुराने शहर की सैर, दरगाह-मंदिर दर्शन, ढोलक खरीदारी और गंगा यात्रा के लिए अच्छा समय है। कार्तिक पूर्णिमा तिगरी गंगा मेले के लिए खास है।
मैदानी गर्मी तेज रहती है। आम का मौसम सक्रिय होता है, लेकिन पुराने शहर और मंदिर यात्रा सुबह या शाम करें।
उमस और बारिश के महीने। गंगा क्षेत्र और आर्द्रभूमियां हरी दिखती हैं, लेकिन निचले रास्तों और मेला मैदानों में सावधानी रखें।
शाह विलायत, वासुदेव मंदिर, ढोलक बाजार, तिगरी गंगा मेला और ग्रामीण मार्गों के लिए सबसे अच्छा मौसम।
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