औघड़नाथ मंदिर काली पलटन
1857 से जुड़ा प्रमुख शिव मंदिर, जिसे मेरठ में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का साक्षी माना जाता है।
औघड़नाथशिव18571857 की क्रांति, हस्तिनापुर विरासत, खेल उद्योग, नौचंदी मेला और गंगा-यमुना दोआब संस्कृति की नगरी
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मेरठ उपजाऊ गंगा-यमुना दोआब में स्थित है और वैदिक सभ्यता, महाभारत के हस्तिनापुर, मध्यकालीन दिल्ली राजनीति और 10 मई 1857 को शुरू हुई क्रांति से जुड़ा है। आज यह खेल उद्योग, शिक्षा, नौचंदी मेले और बहुपरतीय धार्मिक विरासत के लिए भी प्रसिद्ध है।
मेरठ गंगा-यमुना दोआब में स्थित है। आधिकारिक इतिहास इसे वैदिक सभ्यता, मय राष्ट्र और कौरवों की महाभारतकालीन राजधानी हस्तिनापुर से जोड़ता है।
मेरठ ने कुतुबुद्दीन ऐबक और बाद में तैमूर के आक्रमणों के विरुद्ध प्रतिरोध से ऐतिहासिक महत्व पाया और दिल्ली के शासकों से निकट रूप से जुड़ा रहा।
10 मई 1857 को मेरठ में भारतीय सैनिकों ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध विद्रोह किया, एक दिन में शहर पर नियंत्रण पाया और दिल्ली की ओर कूच किया। यही चिंगारी राष्ट्रीय संघर्ष बनी।
आधुनिक मेरठ भारत की स्पोर्ट्स सिटी के रूप में जाना जाता है। यहाँ खेल सामान, चीनी, इलेक्ट्रॉनिक्स, शिक्षा, नौचंदी मेला और मंदिरों, मस्जिदों, चर्चों तथा जैन विरासत का जीवंत मिश्रण है।
1857 से जुड़ा प्रमुख शिव मंदिर, जिसे मेरठ में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का साक्षी माना जाता है।
औघड़नाथशिव18571857 के शहीदों को समर्पित स्मारक परिसर, जहाँ चित्रों, पेंटिंग और डियोरामा से क्रांति की कहानी दिखाई जाती है।
1857संग्रहालयस्वतंत्रता1819 से 1821 के बीच बना यह उत्तर भारत का सबसे पुराना चर्च माना जाता है और मेरठ छावनी का प्रमुख स्थल है।
चर्चछावनीऔपनिवेशिकमॉल रोड का ऐतिहासिक छावनी बाग, जहाँ हरियाली, मनोरंजन स्थल और शाम का म्यूजिकल फाउंटेन आकर्षण है।
बागमॉल रोडफाउंटेनहरित पार्क, जिसे स्थानीय परंपरा महाभारत काल में कर्ण द्वारा सूर्य देव को कवच-कुंडल अर्पित करने से जोड़ती है।
सूरज कुंडकर्णपार्क1628 में नूरजहाँ द्वारा बनवाया गया लाल पत्थर का मुगल मकबरा, जो नक्काशी और बिना छत के अधूरे रूप के लिए प्रसिद्ध है।
दरगाहनूरजहाँमुगलमेरठ के पुराने जैन मंदिरों में से एक, जहाँ सात वेदियाँ, अनेक तीर्थंकर प्रतिमाएँ और तिखाल वाले बाबा परंपरा प्रसिद्ध है।
जैनतीर्थंकरतिखाल वाले बाबासुल्तान नासिरुद्दीन महमूद से जुड़ी ऐतिहासिक ईदगाह, जो बड़े नमाज जमावड़े और दिल्ली सल्तनत काल की स्मृति के लिए जानी जाती है।
ईदगाहदिल्ली सल्तनतनमाजहस्तिनापुर के राजा परीक्षित के नाम पर प्रसिद्ध किला, जिसे स्थानीय परंपरा महाभारत वंश से जोड़ती है।
परीक्षितगढ़हस्तिनापुरमहाभारतजिला इतिहास में प्राचीन हस्तिनापुर को कौरवों की महाभारतकालीन राजधानी बताया गया है और यह आज भी प्रमुख विरासत व तीर्थ सर्किट है।
हस्तिनापुरमहाभारतविरासतप्रसिद्ध नौचंदी मेला 1672 में शुरू हुआ और आज भी मेरठ का प्रमुख वार्षिक सांस्कृतिक उत्सव है।
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छिपी हुई जगह सुझाएँ →मेरठ का स्वाद सर्दियों की रेवड़ी-गजक, नानखटाई, चाट, कचौड़ी, जलेबी, लस्सी, कबाब गलियों और सदर, आबू लेन, बेगम ब्रिज, घंटाघर तथा पुराने बाजारों के नाश्तों से बनता है।
तिल, गुड़ या चीनी से बनी मेरठ की सर्दियों की खास मिठाई, जो नवंबर से फरवरी तक बहुत लोकप्रिय रहती है।
कुरकुरी मक्खनदार स्थानीय बेकरी बिस्किट, जो मेरठ से घर ले जाने वाला क्लासिक नाश्ता है।
तीखी आलू टिक्की, कचौड़ी-सब्जी, जलेबी और लस्सी वाला व्यस्त बाजार नाश्ता मार्ग।
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अक्टूबर से मार्च सबसे अच्छा समय है। सर्दियां रेवड़ी-गजक, जैन-हस्तिनापुर यात्रा और 1857 विरासत सैर के लिए विशेष रूप से अच्छी हैं।
दोआब की तेज गर्मी। विरासत सैर छोटी रखें और खुले स्थल सुबह देखें।
बारिश और उमस रहती है। पार्क हरे दिखते हैं लेकिन ट्रैफिक और गीली गलियाँ यात्रा धीमी कर सकती हैं।
1857 विरासत, हस्तिनापुर, नौचंदी क्षेत्र और सर्दियों की मिठाइयों के लिए सबसे अच्छा मौसम।
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