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Take the scenic route · उत्तर प्रदेश

मऊ

तमसा-घाघरा विरासत, सूफी दरगाह, मंदिर, 1942 स्वतंत्रता स्मृति और वस्त्र उद्योग वाला पूर्वी उत्तर प्रदेश का टेक्सटाइल केंद्र

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तमसा नदी स्मृति, मऊनाथ भंजन और पावरलूम विरासत

मऊ, जिसे मऊनाथ भंजन भी कहा जाता है, रामायण-महाभारत परंपराओं, तमसा नदी स्मृति, प्राचीन वन बसावट, सूफी संत परंपरा, शेर शाह सूरी मार्ग और जहांआरा कालीन शहरी विकास से जुड़ा है। यह आजमगढ़ का हिस्सा रहने के बाद 19 नवंबर 1988 को अलग जिला बना। आज यह पूर्वी उत्तर प्रदेश के मजबूत वस्त्र और पावरलूम केंद्रों में है।

प्राचीन

तमसा नदी और ऋषि परंपरा

मऊ जिला इतिहास इस क्षेत्र को रामायण-महाभारत सांस्कृतिक अवशेष, तमसा नदी स्मृति और वाल्मीकि आश्रम परंपरा से जोड़ता है। जिला उपजाऊ गंगा-घाघरा दोआब में स्थित है और नदी मार्गों पर पुरानी बसावट स्मृति रखता है।

1028-1629

मलिक ताहिर, शेर शाह सूरी और जहांआरा

जिला इतिहास में लगभग 1028 में बाबा मलिक ताहिर, 1540 से 1545 के बीच शेर शाह सूरी के आगमन और 1629 में जहांआरा बेगम को क्षेत्र मिलने का उल्लेख है। कटरा, शाही मस्जिद, मलिक ताहिरपुरा और बुनकर बसावटें इसी शहरी स्मृति से जुड़ी हैं।

1857-1942

दुबारी, दोहरीघाट और मधुबन स्वतंत्रता संघर्ष

मऊ स्वतंत्रता इतिहास 1857 में दुबारी फांसी, दोहरीघाट के गौरी शंकर घाट गोलीकांड, 15 अगस्त 1942 के मधुबन थाना गोलीकांड, पिपरीडीह ट्रेन कार्रवाई, खुरहट स्टेशन दहन और इंदारा-पिपरीडीह रेल व्यवधान का उल्लेख करता है।

1988-वर्तमान

जिला निर्माण और वस्त्र अर्थव्यवस्था

मऊ 19 नवंबर 1988 को अलग जिला बना। इसकी आधुनिक पहचान साड़ी उत्पादन, जरी, कशीदाकारी, पावरलूम, रेडीमेड वस्त्र और उत्तर प्रदेश व अन्य राज्यों में बिकने वाले टेक्सटाइल उत्पादों से गहराई से जुड़ी है।

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वे जगहें जो याद रहेंगी।

धार्मिक मंदिर

शीतला माता मंदिर, माता पोखरा

मऊ शहर में माता पोखरा के पास लोकप्रिय शीतला माता धाम। यह जिला पर्यटन पेज में सूचीबद्ध मुख्य धार्मिक स्थलों में से एक है।

मंदिरशीतला मातामऊ शहर
Van Devi Mandir, Kohinaour in Mau, Uttar Pradesh
प्रकृति मंदिर

वन देवी मंदिर, कोहिनौर

जिला मुख्यालय से लगभग 12 किमी दक्षिण-पश्चिम प्राकृतिक सौंदर्य के बीच स्थित जगत जननी वन देवी मंदिर, जिसे जिला पर्यटन ने सूचीबद्ध किया है।

मंदिरप्रकृतिकोहिनौर
Muktidham Dohrighat in Mau, Uttar Pradesh
घाघरा नदी मंदिर पार्क

मुक्तिधाम दोहरीघाट

दोहरीघाट नगर में घाघरा नदी किनारे स्थित मंदिर और पार्क। यह नदी दृश्य, अनुष्ठान और पूर्वी मऊ यात्रा मार्गों के लिए उपयोगी है।

घाघरादोहरीघाटमंदिर पार्क
Funtasia Water Park and Resort in Mau, Uttar Pradesh
मनोरंजन

फनटेसिया वाटर पार्क और रिसॉर्ट

मऊ शहर से लगभग 7 किमी दूर रतनपुरा में मनोरंजन वाटर पार्क। यह जिला पर्यटन पेज की उपयोगी पारिवारिक अवकाश प्रविष्टि है।

वाटर पार्कपरिवाररतनपुरा
Rose Garden, Mau in Mau, Uttar Pradesh
शहर उद्यान

रोज गार्डन, मऊ

जिला सूची में शामिल मनोरंजन उद्यान, जो आगंतुकों, परिवारों और स्थानीय शहरी अवकाश के लिए उपयोगी है।

उद्यानमनोरंजनशहर
सूफी दरगाह

मीरा शाह दरगाह, कोल्हुआवन

मधुबन के पास मधुबन-दोहरीघाट रोड पर ऐतिहासिक दरगाह, जो सैयद अहमद वदपन या मीरा शाह और शेर शाह सूरी कालीन स्मृति से जुड़ी है।

दरगाहसूफीमधुबन
मुगल विरासत

शाही कटरा और शाही मस्जिद, मऊनाथ भंजन

मऊ शहर की जहांआरा कालीन शहरी स्मृति, जिसमें शाही मस्जिद, कटरा क्षेत्र, पुराने छावनी निशान और भूमिगत सुरंग परंपरा का जिला इतिहास में उल्लेख है।

मुगलशाही कटरामस्जिद
पुराना शहर विरासत

मलिक ताहिरपुरा और कासिमपुरा विरासत

जिला इतिहास में बाबा मलिक ताहिर और मलिक कासिम से जुड़े पुराने मुहल्ले। ये मऊनाथ भंजन नाम और प्रारंभिक शहर बसावट को समझाने में मदद करते हैं।

पुराना शहरमलिक ताहिरकासिमपुरा
स्वतंत्रता विरासत

मधुबन शहीद स्थल और 1942 थाना स्मृति

अगस्त 1942 का प्रमुख स्वतंत्रता संघर्ष स्थल, जहां मधुबन थाना गोलीकांड में तेरह स्वतंत्रता सेनानी शहीद हुए। शहीद स्तंभ इस स्मृति को जीवित रखता है।

1942मधुबनस्वतंत्रता
1857 विरासत

दुबारी स्वतंत्रता स्मृति

मऊ स्वतंत्रता इतिहास में दर्ज 1857 की भागीदारी, कुंवर सिंह समर्थन और हरख सिंह व हुलास सिंह की फांसी से जुड़ा गांव।

1857दुबारीस्वतंत्रता
स्वतंत्रता रेल मार्ग

पिपरीडीह-इंदारा-खुरहट क्रांतिकारी रेल मार्ग

स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान पिपरीडीह ट्रेन कार्रवाई, इंदारा स्टेशन दहन, खुरहट स्टेशन हमला और मऊ-पिपरीडीह लाइन व्यवधान को जोड़ने वाला रेल-संबंधित विरासत मार्ग।

स्वतंत्रतारेलपिपरीडीह
ओडीओपी वस्त्र

मऊ पावरलूम, साड़ी और जरी क्लस्टर

मऊ की ओडीओपी टेक्सटाइल पहचान, जहां घरेलू करघे और पावरलूम साड़ियां, जरी कढ़ाई वाला कपड़ा, सूट, लुंगी और रेडीमेड वस्त्र बनाते हैं।

ओडीओपीवस्त्रपावरलूम
आम रास्ते से थोड़ा अलग

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कुछ स्थानीय स्वाद चखें

स्थानीय भोजन और उत्पाद

मऊ ओडीओपी में टेक्सटाइल उत्पाद जिला है। साड़ियां, जरी कार्य, कशीदाकारी, पावरलूम कपड़ा, सूट, लुंगी, रेडीमेड वस्त्र और कढ़ाई स्थानीय अर्थव्यवस्था के केंद्र में हैं। खाद्य क्षेत्र में भोजपुरी भोजन, मिठाइयां, चाय-नाश्ता, अनाज बाजार और घाघरा किनारे तीर्थ भोजन शामिल हैं।

पावरलूम और हैंडलूम क्लस्टर

मऊ साड़ी और वस्त्र उत्पाद

मऊ ओडीओपी टेक्सटाइल उत्पादों में घरेलू करघों और पावरलूम से बनी साड़ियां, जरी कढ़ाई वाला कपड़ा, सूट, लुंगी, रेडीमेड वस्त्र और सूती कपड़ा शामिल हैं।

मऊनाथ भंजन वस्त्र बाजार

जरी कार्य और कशीदाकारी

जरी धागे की कढ़ाई और कशीदाकारी मऊ की साड़ियों और ड्रेस मटेरियल की मुख्य शिल्प पहचान हैं, जो खरीदारी और कारीगर सामग्री के लिए उपयोगी हैं।

मऊ शहर, घोसी, कोपागंज और दोहरीघाट

भोजपुरी बाजार नाश्ता

चाय, समोसा, कचौरी, जलेबी, पूरी-सब्जी और सरल थाली वस्त्र व्यापारियों, तीर्थ यात्रियों और रेल-सड़क यात्रियों के लिए उपयोगी पड़ाव हैं।

दोहरीघाट और मुक्तिधाम मार्ग

घाघरा किनारे तीर्थ भोजन

दोहरीघाट, घाघरा नदी पड़ाव और मुक्तिधाम यात्रा मार्गों के आसपास सरल शाकाहारी भोजन, मिठाइयां और चाय दुकानें उपयोगी हैं।

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Before you set off.

अक्टूबर से मार्च शीतला माता मंदिर, वन देवी मंदिर, दोहरीघाट मुक्तिधाम, मीरा शाह दरगाह, मधुबन स्वतंत्रता स्थल और वस्त्र बाजार यात्रा के लिए अच्छा समय है। मानसून में घाघरा और निचले ग्रामीण मार्गों की सड़क स्थिति जांचें।

अप्रैल से जून · 33-42 C

गर्मी

गर्मी तेज रहती है और मई के आसपास तापमान चरम पर होता है। मंदिर, वस्त्र बाजार और विरासत क्षेत्र सुबह या शाम देखें।

जुलाई से सितंबर · 30-34 C

मानसून

मानसून में उमस और अच्छी बारिश रहती है। यात्रा से पहले घाघरा किनारे मार्ग, दोहरीघाट पहुंच और ग्रामीण सड़कों की स्थिति जांचें।

अक्टूबर से मार्च · 23-33 C

सर्दी

शीतला माता, वन देवी, मुक्तिधाम, स्वतंत्रता स्थलों और वस्त्र खरीदारी के लिए सबसे अच्छा मौसम। कोहरा रेल और सड़क समय को प्रभावित कर सकता है।

हवाई मार्ग

वाराणसी और गोरखपुर एयरपोर्ट पहुंच

    रेल मार्ग

    मऊ जंक्शन वाराणसी, गोरखपुर और छपरा से जुड़ा

      सड़क मार्ग

      एनएच 24 और एसएच 34 कॉरिडोर