रामग्राम
कोलिय गणराज्य और पवित्र अवशेष स्तूप परंपरा से जुड़ा ऐतिहासिक बौद्ध स्थल। जिला पर्यटन इसे फाह्यान और ह्वेनसांग के विवरण से जोड़ता है।
बौद्धरामग्रामइतिहासरामग्राम, सोहगीबरवा वन, लेहड़ा देवी, सोनौली और फर्नीचर शिल्प वाला नेपाल सीमा तराई जिला
Make room for महराजगंज in your next adventure.
Open trip planner →Know something this guide is missing?Share a hidden place, correction, accessibility detail or seasonal change with our editorial team.
महराजगंज उत्तर प्रदेश के उत्तर-पूर्व कोने में स्थित है और उत्तर में नेपाल से घिरा है। जिले का इतिहास प्राचीन कोशल, कोलिय गणराज्य परंपरा, रामग्राम बौद्ध स्मृति, देवदह विमर्श और तराई वन बसावट से जुड़ता है। महराजगंज 2 अक्टूबर 1989 को गोरखपुर जिले से अलग बनाया गया।
महराजगंज का इतिहास इस क्षेत्र को कोशल, कोलिय गणराज्य परंपरा और रामग्राम से जोड़ता है। जिला पर्यटन में रामग्राम को प्राचीन यात्रियों द्वारा वर्णित पवित्र बौद्ध अवशेषों पर बने स्तूप की परंपरा से जोड़ा गया है।
जिले के इतिहास में बनसिह-कला में 88.8 एकड़ क्षेत्र में नगर, किला और स्तूप अवशेषों का उल्लेख है, जिसे विद्वान देवदह और लुंबिनी-कपिलवस्तु के पास बुद्ध परिवार क्षेत्र से जोड़ते हैं।
महराजगंज 2 अक्टूबर 1989 को गोरखपुर से अलग होकर जिला बना। नेपाल, कुशीनगर, गोरखपुर, सिद्धार्थनगर और संत कबीर नगर के बीच इसकी स्थिति इसे मजबूत सीमा और क्षेत्रीय मार्ग महत्व देती है।
आधुनिक महराजगंज में सोहगीबरवा वन्यजीव, सोनौली अंतरराष्ट्रीय सीमा, गंडक-नारायणी नहर और बैराज क्षेत्र, लेहड़ा देवी तीर्थ तथा ओडीओपी फर्नीचर शिल्प साथ आते हैं।
कोलिय गणराज्य और पवित्र अवशेष स्तूप परंपरा से जुड़ा ऐतिहासिक बौद्ध स्थल। जिला पर्यटन इसे फाह्यान और ह्वेनसांग के विवरण से जोड़ता है।
बौद्धरामग्रामइतिहासफरेंदा-बृजमनगंज मार्ग के पास महत्वपूर्ण दुर्गा तीर्थ, जिसे ऐतिहासिक रूप से अदारुना देवी थान कहा जाता था और स्थानीय आस्था में महाभारत काल से जोड़ा जाता है।
मंदिरदुर्गालेहड़ामहराजगंज-निचलौल-इटहिया मार्ग पर प्राचीन शिव मंदिर, निचलौल से लगभग 13 किमी और महराजगंज से 39 किमी। श्रावण सोमवार और शिवरात्रि पर बड़ी भीड़ आती है।
मंदिरशिवइटहियामहराजगंज और कुशीनगर क्षेत्र में फैला तराई वन्यजीव अभयारण्य, जिसे वन्यजीव, वन पारिस्थितिकी और वनस्पति-जीव संपदा को सुरक्षित करने के लिए विकसित किया गया।
वन्यजीववनतराईभारत-नेपाल का प्रमुख प्रवेश द्वार, जहां रोज पर्यटक, मालवाहक और स्थानीय पैदल आवागमन होता है। यह सीमा व्यापार, यात्रा और नेपाल मार्ग योजना के लिए केंद्रीय है।
सीमानेपालसोनौलीवाल्मीकि नगर बैराज, ए-गैप, बी-गैप, नेपाल बांध और बाढ़ सुरक्षा कार्यों से जुड़ा गंडक-नारायणी नदी क्षेत्र। इसमें प्राकृतिक सुंदरता और सामरिक नदी महत्व है।
गंडकबैराजनदीकटहरा गांव के पास दो प्राचीन काले पत्थर के शिवलिंग। जिला स्थान पेज शैव और बौद्ध संबंध तथा शिवरात्रि सांस्कृतिक उत्सव का उल्लेख करता है।
शिवकटहराप्राचीनटीले, तालाब, प्राचीन शिवलिंग और मूर्ति अवशेषों वाला पुरातात्विक क्षेत्र, जो फरेंदा-सोनौली हाईवे की ओर कोल्हुई-एकसड़वा मार्ग से पहुंचा जाता है।
पुरातत्वटीलेवनरसियाजिला मुख्यालय से कमथा रोड के दक्षिण में स्थित प्राचीन विष्णु मंदिर। मंदिर परिसर की झील से महत्वपूर्ण मूर्तियां मिली हैं।
मंदिरविष्णुमूर्तिमुख्यालय से फरेंदा मार्ग पर जंगल रास्ते में लगभग 3 किमी अंदर ऊंचे स्थान पर स्थित देवी मंदिर। छोटे तीर्थ कवरेज के लिए उपयोगी।
मंदिरदेवीवन मार्गचौक वन क्षेत्र में टीले, तालाबों और पुराने बरगद परिदृश्य वाला मंदिर स्थल। जिला विवरण यहां गोरखनाथी मठ का भी उल्लेख करता है।
मंदिरवनसोनाड़ी देवीनारायणी नहर के पास बधारा महंत में 1786 में स्थापित मंदिर। यहां रथ यात्रा, रामनवमी, चंदन यात्रा, जन्माष्टमी और झूलन जैसे आयोजन होते हैं।
मंदिरजगन्नाथरथ यात्रावन से जुड़े कच्चे माल और कुशल कारीगरों से कुर्सियां, दरवाजे, बेड, सोफा, टेबल और डाइनिंग फर्नीचर बनाने वाली ओडीओपी फर्नीचर पहचान।
ओडीओपीफर्नीचरलकड़ी शिल्पकोई स्थानीय खोज साझा करनी है? बेहतर गाइड बनाने में हमारे संपादकों की मदद करें।
छिपी हुई जगह सुझाएँ →महराजगंज ओडीओपी में फर्नीचर जिले के रूप में जाना जाता है। वन क्षेत्र और साल लकड़ी परंपरा कुर्सी, दरवाजे, बेड, सोफा, टेबल और कुशल लकड़ी शिल्प को आधार देती है। खाद्य अर्थव्यवस्था में चावल, गेहूं, गन्ना, सब्जियां, सीमा बाजार और तराई गांव भोजन भी शामिल हैं।
फर्नीचर ओडीओपी पहचान है, जिसमें कुशल कारीगरों द्वारा बनाई गई कुर्सियां, दरवाजे, बेड, सोफा, टेबल, डाइनिंग टेबल और ड्रेसिंग टेबल शामिल हैं।
चावल, गेहूं, सब्जियां और दालें महराजगंज, निचलौल, फरेंदा और सोनौली के बीच यात्रियों के लिए सरल गांव भोजन बनाती हैं।
गन्ने के खेत जिले में गुड़, गन्ना रस, स्थानीय मिठाइयों और ग्रामीण बाजार भोजन को आधार देते हैं।
मंदिर और नेपाल सीमा यात्रा मार्गों पर चाय, मिठाई, पूरी-सब्जी, समोसा, कचौरी और तुरंत मिलने वाली थाली आम पड़ाव हैं।
संपादकीय समीक्षा के बाद नई कहानियाँ और रील्स यहाँ दिखाई देंगी।
Open member field notes, quieter detours and thoughtful stories from the green side of India.
अक्टूबर से मार्च लेहड़ा देवी, इटहिया शिव मंदिर, रामग्राम, सोहगीबरवा वन्यजीव अभयारण्य, सोनौली और गंडक किनारे मार्गों के लिए अच्छा समय है। श्रावण और शिवरात्रि पर मंदिरों में अधिक भीड़ रहती है।
तराई क्षेत्र में गर्मी और उमस रहती है। लेहड़ा देवी, इटहिया और रामग्राम की यात्रा सुबह रखें और सीमा यात्रा में पानी साथ रखें।
भारी मानसून वन, गंडक क्षेत्र और ग्रामीण सड़कों को प्रभावित कर सकता है। सोहगीबरवा और बैराज मार्गों के लिए स्थानीय स्थिति जांचें।
वन्यजीव, रामग्राम, सोनौली मार्ग, लेहड़ा देवी और लकड़ी शिल्प बाजारों के लिए सबसे अच्छा मौसम। सुबह का कोहरा सड़क और रेल यात्रा धीमी कर सकता है।
गोरखपुर एयरपोर्ट लगभग 58 किमी
आनंद नगर और नौतनवा स्टेशन
गोरखपुर, सोनौली और नेपाल सीमा कॉरिडोर