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अमेठी

गौरीगंज मुख्यालय, गढ़ामाफी, नंदमहर धाम, मलिक मोहम्मद जायसी स्मृति और मूंज शिल्प

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इस जगह को करीब से जानें

सुलतानपुर-रायबरेली तहसीलों से बने आधुनिक अमेठी तक

अमेठी अयोध्या मंडल का जिला है और गौरीगंज इसका मुख्यालय है। यह 1 जुलाई 2010 को सुलतानपुर की अमेठी, गौरीगंज, मुसाफिरखाना तहसीलों और रायबरेली की तिलोई तहसील से बना। पहले नाम छत्रपति शाहूजी महाराज नगर था और बाद में अमेठी हुआ। इसकी पहचान गढ़ामाफी, नंदमहर धाम, जायस के मलिक मोहम्मद जायसी और मूंज उत्पादों से है।

1 जुलाई 2010

अमेठी जिला गठन

अमेठी 1 जुलाई 2010 को अमेठी, गौरीगंज, मुसाफिरखाना और तिलोई तहसीलों को मिलाकर उत्तर प्रदेश का 72वां जिला बना। गौरीगंज जिला मुख्यालय है।

ऐतिहासिक अमेठी

रायपुर-अमेठी और पुराने किले की स्मृति

ओडीओपी परिचय अमेठी को रायपुर-अमेठी भी बताता है और रायपुर को अमेठी के राजाओं, राम नगर, रायपुर-फुलवारी और पुराने किले से जोड़ता है।

मध्यकालीन साहित्य

जायस के मलिक मोहम्मद जायसी

जिला पर्यटन पृष्ठ मलिक मोहम्मद जायसी को जायस के प्रसिद्ध मध्यकालीन सूफी संत के रूप में दर्ज करता है, जिन्होंने अखरी कलाम और पद्मावत की रचना की।

आधुनिक शिल्प

मूंज उत्पाद ओडीओपी पहचान

ओडीओपी अमेठी को मूंज उत्पादों के लिए दर्ज करता है। स्थानीय कारीगर प्राकृतिक सरपत घास से चटाई, बैग, स्टूल, रस्सी, पेन स्टैंड, कुर्सी और टेबल बिना उन्नत उपकरणों के बनाते हैं।

थोड़ा रास्ता बदलने की गुंजाइश रखें

वे जगहें जो याद रहेंगी।

धार्मिक

गढ़ामाफी धाम, माधोपुर

गढ़ामाफी धाम गौरीगंज से लगभग 7 किमी दूर माधोपुर गांव में है और भगवान हनुमान तथा अन्य प्रतिमाओं के लिए प्रसिद्ध है।

गढ़ामाफीहनुमानगौरीगंज
धार्मिक

नंदमहर धाम, गौरीगंज

गौरीगंज का प्रसिद्ध स्थान, जो भगवान श्रीकृष्ण, बलराम, नंद बाबा और वासुदेव जी से संबंधित है।

नंदमहरकृष्णगौरीगंज
सूफी विरासत

मलिक मोहम्मद जायसी मजार, जायस

मध्यकालीन सूफी संत और कवि मलिक मोहम्मद जायसी से जुड़ा स्थल, जिन्हें जायस और अखरी कलाम तथा पद्मावत से जोड़ा गया है।

जायसीसूफीजायस
नगर और यात्रा आधार

गौरीगंज जिला मुख्यालय

जिला मुख्यालय और गढ़ामाफी, नंदमहर, अमेठी नगर, जायस तथा मूंज शिल्प क्षेत्रों के लिए मुख्य रेल-सड़क आधार।

गौरीगंजजिला मुख्यालयआवागमन
ऐतिहासिक नगर

अमेठी या रायपुर-अमेठी नगर

ओडीओपी परिचय अमेठी को रायपुर-अमेठी भी कहता है और इसे पुराने राज परिवार, राम नगर तथा रायपुर-फुलवारी किला परंपरा से जोड़ता है।

अमेठी नगररायपुर अमेठीपुराना किला
किला स्मृति

रायपुर-फुलवारी पुराना किला स्मृति

ओडीओपी बताता है कि अमेठी राजाओं के पूर्वज रायपुर-फुलवारी में रहते थे और वहां पुराने किले का स्थान आज भी है।

रायपुर फुलवारीपुराना किलाअमेठी राजा
ओडीओपी शिल्प

मूंज उत्पाद और सरपत शिल्प क्लस्टर

स्थानीय सरपत घास से कारीगर चटाई, कैरी बैग, स्टूल, रस्सी, पेन स्टैंड, कुर्सी और टेबल बनाते हैं।

ओडीओपीमूंजसरपत
सांस्कृतिक

जायस साहित्य और सूफी सर्किट

जायस मलिक मोहम्मद जायसी की साहित्यिक और सूफी पहचान के कारण अमेठी का महत्वपूर्ण सांस्कृतिक पड़ाव है।

जायससाहित्यसूफी
यात्रा और बाजार

मुसाफिरखाना मार्ग और ग्रामीण बाजार

मुसाफिरखाना अमेठी जिला गठन वाली तहसीलों में था और ग्रामीण बाजार, भोजन पड़ाव तथा जिला आवागमन के लिए उपयोगी है।

मुसाफिरखानाबाजारमार्ग
जिला विरासत

तिलोई और रायबरेली सीमा बेल्ट

तिलोई तहसील अमेठी जिला गठन में रायबरेली से लाई गई थी, इसलिए यह बेल्ट अमेठी-रायबरेली प्रशासनिक संबंध समझने में उपयोगी है।

तिलोईरायबरेली संबंधजिला गठन
आम रास्ते से थोड़ा अलग

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कुछ स्थानीय स्वाद चखें

स्थानीय स्वाद

अमेठी में अवध-पूर्वांचल का सरल भोजन मिलता है: मंदिर प्रसाद, कचौड़ी-सब्जी, जलेबी, समोसा-चाय, दाल-भात, रोटी-सब्जी, लिट्टी-चोखा, सत्तू और ग्रामीण बाजारों की मिठाइयां।

गौरीगंज क्षेत्र

गढ़ामाफी और नंदमहर प्रसाद

गढ़ामाफी और नंदमहर यात्रा में प्रसाद, पेड़ा, बताशा, चाय और हल्की मिठाई सरल विकल्प हैं।

गौरीगंज, अमेठी और जायस बाजार

कचौड़ी-सब्जी, जलेबी और चाय

जिला बाजारों में कचौड़ी-सब्जी, जलेबी, समोसा और चाय उपयोगी नाश्ता हैं।

ग्रामीण अमेठी

दाल-भात और रोटी-सब्जी

ग्रामीण मार्गों पर दाल-भात, रोटी-सब्जी, अचार और रायता भरोसेमंद भोजन हैं।

मुसाफिरखाना और सड़क मार्ग

लिट्टी-चोखा और सत्तू

सड़क यात्रा में लिट्टी-चोखा, सत्तू, प्याज, अचार और चटनी भरपेट स्थानीय विकल्प हैं।

अमेठी, गौरीगंज और जायस

मौसमी मिठाई और ग्रामीण बाजार स्नैक्स

पेड़ा, बर्फी, जलेबी, नमकीन और स्थानीय सूखे स्नैक्स शिल्प खरीदारी और तीर्थ यात्रा के साथ उपयोगी हैं।

एक दूसरे यात्री की नज़र से

यात्रा पत्रिका से।

संपादकीय समीक्षा के बाद नई कहानियाँ और रील्स यहाँ दिखाई देंगी।

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Before you set off.

अक्टूबर से मार्च अमेठी के लिए बेहतर है। मंदिर और मजार यात्रा सुबह रखें। मूंज उत्पाद खरीदारी और ग्रामीण शिल्प यात्रा के लिए सर्दी सबसे आरामदायक है।

नवंबर से फरवरी · 7 C - 24 C

सर्दी

गढ़ामाफी, नंदमहर, जायसी मजार, गौरीगंज बाजार और मूंज शिल्प यात्रा के लिए श्रेष्ठ।

मार्च से जून · 31 C - 44 C

गर्मी

दोपहर गर्म रहती है। मंदिर, मजार और शिल्प बाजार सुबह या शाम देखें।

जुलाई से सितंबर · 25 C - 34 C

मानसून

ग्रामीण निचले क्षेत्र और सरपत घास वाले इलाके हरे दिखते हैं, पर बारिश के बाद गांवों के मार्ग कीचड़ भरे हो सकते हैं।

अक्टूबर से मार्च · 12 C - 30 C

शिल्प और तीर्थ मौसम

मूंज शिल्प खरीदारी, मंदिर यात्रा, जायस विरासत और गौरीगंज आधारित यात्रा के लिए आरामदायक।

सड़क

गौरीगंज सड़क संपर्क

    रेल

    गौरीगंज रेल मार्ग

      हवाई मार्ग

      लखनऊ, प्रयागराज और अयोध्या एयरपोर्ट

        स्थानीय परिवहन

        गढ़ामाफी, नंदमहर, जायस और मूंज क्लस्टर