देवराहा बाबा आश्रम, मईल
बरहज तहसील के मईल गांव में सरयू नदी किनारे स्थित आश्रम। यह 19 मई 1990 को दिवंगत हुए प्रसिद्ध संत देवराहा बाबा की स्मृति को संजोता है।
आश्रमसरयूबरहजदेवराहा बाबा आश्रम, बरहज सरयू घाट, स्वतंत्रता स्मृति और शिल्प क्लस्टर वाला मंदिर-समृद्ध पूर्वी उत्तर प्रदेश जिला
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देवरिया प्राचीन कोशल सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़ा है। जिला इतिहास इस क्षेत्र को रामायण परंपरा, कुशावती, मल्ल गणराज्य, बौद्ध-जैन अवशेष और पुराने मंदिर बसावटों से जोड़ता है। नाम देवारण्य या देवपुरिया से संबंधित माना जाता है, जिसका अर्थ मंदिरों वाला स्थान है। देवरिया 16 मार्च 1946 को गोरखपुर से अलग जिला बना और मई 1994 में कुशीनगर देवरिया से अलग किया गया।
वर्तमान देवरिया क्षेत्र प्राचीन कोशल का हिस्सा था और देवारण्य या देवपुरिया से जुड़ा माना जाता है, जिसका अर्थ मंदिरों से भरा स्थान है। प्रतिमाएं, सिक्के, ईंटें, मंदिर और बौद्ध मठों के अवशेष यहां पुराने संगठित समाज का संकेत देते हैं।
जिला इतिहास मल्ल प्रभाव, बौद्ध-जैन अवशेष और सोहनाग-खुखुन्दू जैसे पवित्र स्थलों का उल्लेख करता है। यह क्षेत्र व्यापक कुशीनगर और पावा बौद्ध-जैन परिदृश्य से स्वाभाविक रूप से जुड़ता है।
1920 में गांधी ने देवरिया और पडरौना में सभाओं को संबोधित किया, 1930 में बाबा राघव दास ने नमक आंदोलन गतिविधि चलाई और भारत छोड़ो आंदोलन में सैकड़ों लोग जेल गए। 16 मार्च 1946 को देवरिया अलग जिला बना।
आधुनिक देवरिया मंदिर मार्ग, बरहज सरयू घाट, देवराहा बाबा स्मृति, रुद्रपुर और लार कस्बा मार्ग तथा ओडीओपी सजावटी उत्पाद, कढ़ाई-बुनाई और रेडीमेड वस्त्र उत्पादन को साथ लेकर चलता है।
बरहज तहसील के मईल गांव में सरयू नदी किनारे स्थित आश्रम। यह 19 मई 1990 को दिवंगत हुए प्रसिद्ध संत देवराहा बाबा की स्मृति को संजोता है।
आश्रमसरयूबरहजरुद्रपुर नगर से लगभग 2 किमी उत्तर स्थित पुराना शिव मंदिर, जिसे जिला पूर्वोत्तर उत्तर प्रदेश के प्रमुख तीर्थों में गिनता है।
मंदिरशिवरुद्रपुरदेवरिया-कसिया रोड पर स्थित महत्वपूर्ण मंदिर, जो देवरिया से कुशीनगर दिशा में जाने वाले यात्रियों के लिए प्रसिद्ध धार्मिक पड़ाव है।
मंदिरबालाजीदेवरिया-कसिया रोडदेवरिया के राघव नगर में लोकप्रिय सिद्ध हनुमान मंदिर, जहां बड़ा तालाब है और मंगलवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
मंदिरहनुमानराघव नगरदेवरिया शहर में कसिया रोड और सोमनाथ मंदिर क्षेत्र के पास प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर, जो मनोकामना आस्था के लिए स्थानीय रूप से जाना जाता है।
मंदिरदुर्गाशहरबरहज के आसपास सरयू नदी घाट क्षेत्र, जो स्नान, स्थानीय अनुष्ठान, नदी दृश्य और मईल स्थित देवराहा बाबा आश्रम पहुंच के लिए महत्वपूर्ण है।
सरयूघाटबरहजजिला इतिहास में परशुराम तपस्या, जमदग्नि और रेणुका प्रतिमाओं तथा पुराने ब्राह्मणिक अवशेषों से जुड़ा सांस्कृतिक महत्व का प्राचीन स्थल।
परशुरामप्राचीनसोहनागजिला इतिहास में जैन मंदिर परंपरा और नीले पत्थर की शिव-पार्वती, गणेश और चतुर्भुज विष्णु प्रतिमाओं के लिए प्रसिद्ध ऐतिहासिक गांव।
जैनपुरातत्वखुखुन्दूदेवरिया के आधुनिक इतिहास में महत्वपूर्ण स्थानों में जिला इतिहास द्वारा उल्लेखित गांव, जो स्वतंत्रता आंदोलन और ग्रामीण विरासत सामग्री के लिए उपयोगी है।
स्वतंत्रतागांवविरासतदेवरिया मुख्यालय से लगभग 38 किमी उत्तर-पूर्व का पुराना नगर, जिसे जिला इतिहास वशिष्ठ की गाय की स्थानीय कथा और पुरानी बसावट स्मृति से जोड़ता है।
कस्बालारविरासतरुद्रपुर क्षेत्र दुग्धेश्वर नाथ मंदिर, पुरानी स्थानीय रियासत स्मृति, बाजारों और देवरिया-बरहज-रुद्रपुर यात्रा मार्ग के लिए महत्वपूर्ण है।
रुद्रपुरबाजारमंदिर मार्गदेवरिया बाजार और छोटी इकाइयों में सजावटी उत्पाद, कढ़ाई-बुनाई उत्पाद और रेडीमेड वस्त्रों को शामिल करने वाली ओडीओपी से जुड़ी स्थानीय अर्थव्यवस्था प्रविष्टि।
ओडीओपीसजावटी उत्पादवस्त्रकोई स्थानीय खोज साझा करनी है? बेहतर गाइड बनाने में हमारे संपादकों की मदद करें।
छिपी हुई जगह सुझाएँ →देवरिया ओडीओपी सूची में सजावटी उत्पाद, कढ़ाई-बुनाई उत्पाद और रेडीमेड वस्त्रों के लिए जाना जाता है। स्थानीय बाजारों में देवरिया, बरहज, रुद्रपुर और लार के आसपास भोजपुरी भोजन, धान, गेहूं, गन्ना, सब्जियां और सरयू किनारे तीर्थ नाश्ता भी मिलता है।
देवरिया सजावटी उत्पाद, कढ़ाई-बुनाई उत्पाद और रेडीमेड वस्त्रों के लिए सूचीबद्ध है, जो शिल्प, खरीदारी और स्थानीय अर्थव्यवस्था पेजों के लिए उपयोगी है।
चाय, कचौरी, जलेबी, पूरी-सब्जी और सरल थाली मंदिर मार्ग और बस-रेल यात्रियों के लिए उपयोगी पड़ाव हैं।
चावल, गेहूं, गन्ना और सब्जियां जिले में रोजमर्रा के भोजन, मिठाई, गुड़ और ग्रामीण बाजार भोजन को आकार देती हैं।
बरहज और मईल क्षेत्र के तीर्थ मार्ग सरयू घाटों के पास मौसमी मिठाइयां, चाय दुकानें, नाश्ता और सरल शाकाहारी भोजन देते हैं।
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अक्टूबर से मार्च देवराहा बाबा आश्रम, दुग्धेश्वर नाथ, देवराही माता, सोहनाग, खुखुन्दू और बरहज घाटों के लिए अच्छा समय है। शिवरात्रि और मंगलवार मंदिर यात्राओं में अधिक भीड़ रहती है।
पूर्वी मैदानी गर्मी तेज रहती है। मंदिर यात्रा सुबह या शाम रखें, खासकर रुद्रपुर, देवराही माता और देवरिया शहर पड़ाव।
उमस और बारिश रहती है। बरहज सरयू घाट, मईल आश्रम और ग्रामीण विरासत गांवों से पहले स्थानीय सड़क स्थिति जांचें।
मंदिरों, सरयू घाटों, सोहनाग, खुखुन्दू, लार और कस्बा-बाजार मार्गों के लिए सबसे अच्छा मौसम। सुबह कोहरा रेल और सड़क यात्रा धीमी कर सकता है।
गोरखपुर एयरपोर्ट लगभग 53 किमी
देवरिया सदर रेलवे स्टेशन
पूर्वी यूपी में बस संपर्क