सीता समाहित स्थल, सीतामढ़ी
गंगा किनारे भदोही का सबसे प्रसिद्ध तीर्थ-पर्यटन स्थल, जो माता सीता के धरती में समाहित होने की परंपरा से जुड़ा है। 110 फीट हनुमान प्रतिमा प्रमुख आकर्षण है।
मंदिरगंगासीतामढ़ीकालीन नगरी, सीता समाहित स्थल, गंगा किनारा और संत रविदास परंपरा
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भदोही का नाम भर राज परंपरा से जुड़ा है। अकबर काल में यह इलाहाबाद सरकार का हिस्सा रहा, बाद में बनारस राज्य से जुड़ा, और 30 जून 1994 को वाराणसी से अलग जिला बना। आज यह हस्तनिर्मित कालीन और दरी का बड़ा केंद्र है।
भदोही का नाम भर राज परंपरा से जुड़ा है। अकबर काल में यह इलाहाबाद सरकार का हिस्सा था और बाद में क्षेत्रीय जमींदारी तथा बनारस राज्य से जुड़ा।
भदोही 30 जून 1994 को वाराणसी जिले से अलग होकर जिला बना। इसे संत रविदास नगर पहचान से भी जाना जाता है।
भदोही भारत के सबसे बड़े हस्तनिर्मित कालीन केंद्रों में है। हाथ से बुने कालीन, दरी, इंडो गैब्बे, निर्यात इकाइयां, करघे और भारतीय कालीन प्रौद्योगिकी संस्थान इसकी अर्थव्यवस्था बनाते हैं।
गंगा किनारे भदोही का सबसे प्रसिद्ध तीर्थ-पर्यटन स्थल, जो माता सीता के धरती में समाहित होने की परंपरा से जुड़ा है। 110 फीट हनुमान प्रतिमा प्रमुख आकर्षण है।
मंदिरगंगासीतामढ़ीगोपीगंज नगर का प्रसिद्ध प्राचीन शिव मंदिर, जो विंध्याचल और मीरजापुर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी पड़ाव है।
शिव मंदिरगोपीगंजतीर्थज्ञानपुर में तालाब के पश्चिमी घाट पर स्थित प्राचीन शिव मंदिर, जिला मुख्यालय से लगभग 3 किमी पूर्व।
मंदिरज्ञानपुरतालाबज्ञानपुर तहसील के दिघ ब्लॉक में गंगा के पास प्राचीन शिव धाम, जो ग्रामीण तीर्थ और सावन दर्शन के लिए महत्वपूर्ण है।
शिव मंदिरगंगासेमराधनाथऔराई तहसील का प्रमुख स्थानीय आस्था केंद्र, जहां देवी उपासना और पारिवारिक धार्मिक अवसरों पर लोग आते हैं।
देवी मंदिरऔराईआस्थाऔराई तहसील के त्रिलोकपुर ग्राम सभा में संत रविदास से जुड़ा श्रद्धा स्थल, जो जिले की संत परंपरा दिखाता है।
संत रविदासत्रिलोकपुरआध्यात्मिकज्ञानपुर तहसील के विहरोजपुर में गंगा किनारे शांत आध्यात्मिक केंद्र, जो शांत धार्मिक यात्रा के लिए उपयोगी है।
आश्रमगंगाविहरोजपुरभदोही का स्थानीय रूप से प्रसिद्ध महावीर हनुमान मंदिर, जो आसपास के श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी है।
हनुमान मंदिरचकवास्थानीय आस्थाभदोही ओडीओपी के तहत विश्व प्रसिद्ध कालीन और दरी उत्पादन-निर्यात जिला है, जो हाथ से बुने कालीन, करघे, डिजाइन और निर्यात इकाइयों के लिए जाना जाता है।
ओडीओपीकालीनदरीभदोही का भारतीय कालीन प्रौद्योगिकी संस्थान विशेष कालीन और वस्त्र तकनीक शिक्षा से जिले की शिल्प अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है।
आईआईसीटीकालीन तकनीककौशलकोई स्थानीय खोज साझा करनी है? बेहतर गाइड बनाने में हमारे संपादकों की मदद करें।
छिपी हुई जगह सुझाएँ →मंदिर प्रसाद, कचौड़ी-सब्जी, जलेबी, घाट किनारे चाय, लिट्टी-चोखा, दाल-भात और बुनाई क्लस्टर का घरेलू भोजन यात्रा को उपयोगी बनाते हैं।
सीता समाहित स्थल, गोपीगंज, ज्ञानपुर और सेमराधनाथ के आसपास प्रसाद, पेड़ा, बताशा और हल्की मिठाइयां यात्रियों के लिए उपयोगी हैं।
पुराने बाजार क्षेत्रों में कचौड़ी-सब्जी, जलेबी और चाय सबसे आसान स्थानीय नाश्ता हैं।
सड़क यात्रा और कार्पेट क्लस्टर भ्रमण के बाद लिट्टी-चोखा, दाल-भात, सब्जी और अचार भरपेट स्थानीय भोजन है।
सीतामढ़ी और गंगा तट पर चाय, पकौड़ी, समोसा और नमकीन छोटे पड़ाव के लिए अच्छे हैं।
बुनाई क्षेत्रों में दाल, चावल, रोटी, मौसमी सब्जी और अचार वाला सरल भोजन स्थानीय शिल्प जीवन से जोड़ता है।
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अक्टूबर से मार्च श्रेष्ठ है। सीता समाहित स्थल और गंगा तट के लिए सर्दी बेहतर है। सावन, शिवरात्रि और मेलों में मंदिरों पर अधिक भीड़ रहती है।
सीता समाहित स्थल, गंगा किनारे यात्रा, कार्पेट क्लस्टर, ज्ञानपुर और गोपीगंज बाजार के लिए श्रेष्ठ।
दोपहर गर्म रहती है। मंदिर और बाजार सुबह या शाम रखें और सड़क यात्रा में पानी साथ रखें।
ग्रामीण हरियाली और गंगा क्षेत्र सुंदर रहता है, पर बारिश के बाद नदी किनारे और गांव के मार्गों पर सावधानी रखें।
शिव मंदिरों, देवी स्थलों और सीता समाहित स्थल पर भीड़ बढ़ती है। दर्शन के लिए जल्दी निकलें।
वाराणसी और प्रयागराज के बीच
भदोही, ज्ञानपुर रोड और आसपास स्टेशन
निकटतम एयरपोर्ट वाराणसी बाबतपुर
मंदिर, गंगा और कार्पेट क्लस्टर