देवा शरीफ
बाराबंकी से 12 किमी और लखनऊ से 42 किमी दूर तीर्थ कस्बा, जो हाजी वारिस अली शाह की दरगाह, उर्स, देवा मेला, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और बड़े मेले की परंपरा के लिए प्रसिद्ध है।
उत्तर प्रदेश जिला गाइड
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बाराबंकी उत्तर प्रदेश का महत्वपूर्ण जिला है, जिसका मुख्यालय Barabanki है। यह गाइड production travel website के लिए प्रमुख धार्मिक, ऐतिहासिक, प्राकृतिक, बाजार और स्थानीय संस्कृति से जुड़े स्थानों को कवर करती है।
जिला इतिहास क्षेत्र को अयोध्या, सतरिख में गुरु वशिष्ठ, घाघरा किनारे पांडव स्मृति, कुंतेश्वर महादेव और किंतूर के पारिजात वृक्ष से जोड़ता है।
देवा शरीफ हाजी वारिस अली शाह की जन्मभूमि और दरगाह है, जहां सार्वभौमिक प्रेम का संदेश उर्स, देवा मेला और सांस्कृतिक आयोजनों में जीवित है।
बाराबंकी में 1857 से 1858 के स्थानीय प्रतिरोध और बाद में असहयोग, खिलाफत, नमक आंदोलन व भारत छोड़ो आंदोलन की भागीदारी दर्ज है, साथ ही रफी अहमद किदवई जैसे नेता याद किए जाते हैं।
ओडीओपी बाराबंकी को वस्त्र उत्पादों के लिए चिन्हित करता है और बताता है कि शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 11200 बुनकर हैंडलूम बुनाई से जुड़े हैं।
बाराबंकी से 12 किमी और लखनऊ से 42 किमी दूर तीर्थ कस्बा, जो हाजी वारिस अली शाह की दरगाह, उर्स, देवा मेला, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और बड़े मेले की परंपरा के लिए प्रसिद्ध है।
रामनगर तहसील में घाघरा किनारे महादेवा का प्राचीन शिव मंदिर, जो महाशिवरात्रि भीड़, कांवड़ भक्तों और लोधेश्वर शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है।
कुंती और स्थानीय परंपराओं से जुड़ा किंतूर का अद्वितीय प्राचीन पारिजात वृक्ष, कुंतेश्वर महादेव के पास स्थित है। जिला इसकी वनस्पति पहचान एडानसोनिया डिजिटाटा बताता है।
कुंती और प्राचीन स्थानीय परंपराओं से जुड़ा किंतूर का मंदिर, जिसे पारिजात वृक्ष के साथ देखा जाता है।
बड़ोसराय के पास सतनामी संप्रदाय के संस्थापक बाबा जगजीवन दास का मंदिर, जहां तालाब के पास अक्टूबर और अप्रैल के मेलों में श्रद्धालु स्नान करते हैं।
पहले सिद्धपुरा कहलाने वाला सिद्धौर सिद्धेश्वर महादेव मंदिर और मेलों के लिए प्रसिद्ध है। जिला इसे बाराबंकी मुख्यालय से लगभग 50 किमी बताता है।
सप्तरिशि और गुरु वशिष्ठ से जुड़ी परंपरा वाला स्थल। जिला सालार शाह से जुड़े मकबरों और ज्येष्ठ की वार्षिक सभा का भी उल्लेख करता है।
सोती धारा किनारे भितौली को 1857 से 1858 के स्वतंत्रता सेनानियों का अंतिम मोर्चा बताया गया है, जहां किले के अवशेष और संरक्षित विरासत स्मृति है।
ओडीओपी बाराबंकी को हैंडलूम वस्त्र उत्पादों के लिए चिन्हित करता है, जहां शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में बुनाई होती है और हजारों बुनकर सूती कपड़ा उत्पादन से जुड़े हैं।
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छिपी हुई जगह सुझाएँ →बाराबंकी में Awadhi cuisine and Dewa sweets लोकप्रिय हैं। स्थानीय बाजारों और यात्रा मार्गों पर क्षेत्रीय उत्तर प्रदेश स्वाद के साथ उत्तर भारतीय भोजन मिलता है।
देवा या महादेवा जाने से पहले शहर बाजार, स्टेशन क्षेत्र और बस स्टैंड के आसपास मिलने वाला सामान्य सुबह का भोजन।
देवा मेला के दौरान दरगाह क्षेत्र मिठाई, नाश्ता, चाय दुकानों और मेला भोजन के साथ शिल्प व घरेलू वस्तुओं की दुकानों के लिए जाना जाता है।
रोटी, दाल, चावल, सब्जी, दही और अचार वाली सादी थाली हाइवे यात्रियों और पारिवारिक तीर्थ समूहों के लिए उपयोगी है।
महाशिवरात्रि और कांवड़ अवधि में मंदिर मार्ग के पास प्रसाद, पूरी सब्जी, चाय और मौसमी मेला नाश्ता मिलता है।
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अक्टूबर से मार्च घूमने के लिए बेहतर समय है। गर्मियों में दोपहर की यात्रा से बचें।
देवा शरीफ, महादेवा, पारिजात, कोटवा धाम और विरासत यात्रा के लिए सबसे अच्छा मौसम। सुबह यात्रा के लिए हल्का गर्म कपड़ा रखें।
मैदानी गर्म मौसम। मंदिर और मेला स्थल सुबह जल्दी या शाम को देखें और ग्रामीण मार्गों पर पानी रखें।
नमी वाला मौसम, गांव और नदी क्षेत्र हरे हो जाते हैं लेकिन जलभराव हो सकता है। यात्रा में अतिरिक्त समय रखें।
एनएच-28, एनएच-28सी और एनएच-56 कनेक्टिविटी
बाराबंकी रेलवे स्टेशन
निकट लखनऊ हवाई अड्डा
देवा, महादेवा और किंतूर मार्ग