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Take the scenic route · उत्तर प्रदेश

बहराइच

नेपाल सीमा का तराई जिला, जहां कतर्नियाघाट वन्यजीव, चित्तौरा झील, महाराजा सुहेलदेव स्मृति, मरी माता, संघारिणी मंदिर और गेहूं-डंठल शिल्प प्रमुख हैं।

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बहराइच: ब्रह्मा वन, सरयू नगर और स्वतंत्रता संघर्ष

बहराइच का आधिकारिक इतिहास घने जंगलों, तेज बहती नदियों, गंधर्व वन स्मृति, भर वंश परंपरा और लव, प्रसेनजित, ऋषि अष्टावक्र, वाल्मीकि तथा बालार्क से जुड़े संदर्भ बताता है। 1857 में भिनगा, बौंडी, चहलारी, रेहुआ, चरदा, नानपारा और अन्य स्थानीय शासकों के माध्यम से जिले की मजबूत भूमिका रही। आज बहराइच कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य, चित्तौरा झील, सुहेलदेव स्मारक, मंदिरों, सरयू-घाघरा नदी संस्कृति और गेहूं-डंठल हस्तशिल्प के लिए जाना जाता है।

प्राचीन

ब्रह्मा वन और सरयू परंपराएं

बहराइच का आधिकारिक इतिहास इस क्षेत्र को ब्रह्मा पूजा वन, गंधर्व वन, राजा लव, राजा प्रसेनजित, पांडव, ऋषि अष्टावक्र, ऋषि वाल्मीकि और बालार्क परंपराओं से जोड़ता है।

मध्यकाल

भर वंश और सुहेलदेव स्मृति

मध्यकालीन परंपराएं बहराइच को भर वंश शासन और महाराजा सुहेलदेव से जोड़ती हैं, जिन्हें चित्तौरा झील के पास 1034 के युद्ध के लिए याद किया जाता है।

1857

व्यापक स्वतंत्रता संघर्ष

आधिकारिक इतिहास बहराइच को 1857 का सक्रिय केंद्र बताता है, जिसमें भिनगा, बौंडी, चहलारी, रेहुआ, चरदा, नानपारा, बरगदिया, मस्जिदिया और अन्य स्थानीय मोर्चे शामिल थे।

जीवंत संस्कृति

कतर्नियाघाट और गेहूं-डंठल शिल्प

आधुनिक बहराइच कतर्नियाघाट वन्यजीव, सरयू-घाघरा नदी मार्ग, मंदिर, सुहेलदेव स्मृति और ओडीओपी गेहूं-डंठल हस्तशिल्प को साथ लेकर चलता है।

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वे जगहें जो याद रहेंगी।

Katarniaghat Wildlife Sanctuary in Bahraich, Uttar Pradesh
वन्यजीव अभयारण्य

कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य

संरक्षित तराई वन और दुधवा टाइगर रिजर्व परिदृश्य का हिस्सा, जो भारत के दुधवा-किशनपुर को नेपाल के बर्दिया नेशनल पार्क से जोड़ता है।

कतर्नियाघाटवन्यजीवदुधवा
नदी वन्यजीव

गिरवा नदी और कतर्नियाघाट डॉल्फिन-मगर बेल्ट

कतर्नियाघाट के आसपास नदी वन्यजीव मार्ग, जो वन नदी दृश्य, मगरमच्छ, घड़ियाल संरक्षण संदर्भ, डॉल्फिन और पक्षियों के लिए जाना जाता है।

गिरवानदीवन्यजीव
स्मारक

महाराजा सुहेलदेव स्मारक नगरौरा

नगरौरा स्थित महाराजा सुहेलदेव स्मारक और पार्क, जो चित्तौरा झील के पास 1034 के युद्ध की स्मृति से जुड़ा है।

सुहेलदेवस्मारकइतिहास
झील विरासत

चित्तौरा झील और युद्ध स्मृति

महाराजा सुहेलदेव और बहराइच युद्ध से जुड़ा ऐतिहासिक झील परिदृश्य, जो विरासत, फोटोग्राफी और स्थानीय तीर्थ मार्गों के लिए उपयोगी है।

चित्तौराझीलसुहेलदेव
ऐतिहासिक दरगाह

दरगाह सैयद सालार मसूद गाजी

बहराइच की प्रमुख ऐतिहासिक दरगाह, जो मध्यकालीन गाजी मियां परंपरा और स्थानीय तीर्थ इतिहास से जुड़ी है। इसे आस्था और विरासत स्थल के रूप में तटस्थ रूप से प्रस्तुत करें।

दरगाहगाजी मियांविरासत
मंदिर

मरी माता मंदिर गोलवाघाट

बहराइच-लखनऊ हाईवे के पास सरयू नदी किनारे स्थित मंदिर, जो नवरात्रि और सोमवार-शुक्रवार की पूजा के लिए महत्वपूर्ण है।

मरी मातामंदिरसरयू
मंदिर

संघारिणी मंदिर डिगिहा

डिगिहा चौराहा स्थित लोकप्रिय मंदिर, जो महाकाली और देवी के अनेक रूपों को समर्पित है तथा चैत्र और आश्विन नवरात्रि में विशेष रूप से देखा जाता है।

संघारिणीकालीनवरात्रि
स्वतंत्रता मार्ग

गुल्लाबीर स्वतंत्रता बैठक स्थल

जिला इतिहास में 1857 की गोपनीय बैठक के स्थल के रूप में याद किया गया स्थान, जहां नाना साहेब ने भिनगा, बौंडी, चहलारी, रेहुआ और चरदा के स्थानीय शासकों से मुलाकात की।

1857गुल्लाबीरस्वतंत्रता
विरासत मार्ग

नानपारा स्वतंत्रता और एस्टेट मार्ग

नानपारा मार्ग 1857 संघर्ष, तराई आवाजाही, पुराने एस्टेट स्मृति और कतर्नियाघाट व नेपाल सीमा क्षेत्र की पहुंच से जुड़ा है।

नानपारा1857तराई
स्वतंत्रता मार्ग

चरदा और बरगदिया 1857 मार्ग

जिला इतिहास 1857 विद्रोह के बाद चरदा, बरगदिया, मस्जिदिया और धर्मनपुर क्षेत्र में संघर्ष का उल्लेख करता है, इसलिए यह महत्वपूर्ण विरासत मार्ग है।

चरदाबरगदिया1857
शिल्प क्लस्टर

बहराइच गेहूं-डंठल हस्तशिल्प क्लस्टर

बहराइच का ओडीओपी शिल्प, जिसमें कारीगर गेहूं के डंठल से कपड़े के फ्रेम पर कलाकृति बनाते हैं। इस शिल्प से राज्य पुरस्कार प्राप्त कारीगर जुड़े हैं।

गेहूं डंठलओडीओपीशिल्प
कृषि मार्ग

बहराइच फूड प्रोसेसिंग और दाल क्षेत्र

ओडीओपी प्रोफाइल बहराइच में दाल, गेहूं, धान, मक्का, सब्जियां, कोल्ड स्टोरेज, मटर प्रोसेसिंग और ग्रामीण फूड प्रोसेसिंग गतिविधि का उल्लेख करता है।

फूड प्रोसेसिंगदालेंकृषि
आम रास्ते से थोड़ा अलग

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कुछ स्थानीय स्वाद चखें

स्थानीय भोजन

बहराइच के भोजन में तराई चावल, दालें, गेहूं, गन्ने का गुड़, स्थानीय सब्जियां, वन मार्ग स्नैक्स, मंदिर प्रसाद, बाजार कचौरी-जलेबी और ग्रामीण फूड प्रोसेसिंग उत्पाद शामिल करें।

बहराइच शहर, नानपारा और ग्रामीण बाजार

तराई चावल, दाल और मौसमी सब्जियां

निचले तराई कृषि क्षेत्र के कारण चावल, दालें, गेहूं, सब्जियां और रोजमर्रा ग्रामीण भोजन बहराइच फूड कवरेज में प्रमुख हैं।

जरवल, कैसरगंज, नानपारा और ग्रामीण क्षेत्र

गन्ना गुड़ और सर्दियों की मिठाइयां

गन्ना और ग्रामीण बाजार जिले में गुड़, रेवड़ी, गजक और सर्दियों की मिठाइयों को सहारा देते हैं।

मोतिपुर, नानपारा और कतर्नियाघाट मार्ग

कतर्नियाघाट वन मार्ग स्नैक्स

चाय, पकौड़ी, पूरी-सब्जी और सरल ढाबा भोजन वन्यजीव मार्ग के व्यावहारिक भोजन ठिकाने हैं।

मरी माता, संघारिणी और बहराइच शहर बाजार

मंदिर प्रसाद और बाजार कचौरी जलेबी

मंदिरों और शहर बाजारों के आसपास प्रसाद, कचौरी, जलेबी, समोसा और मिठाइयों वाला उपयोगी तीर्थ फूड ट्रेल।

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Before you set off.

नवंबर से मार्च कतर्नियाघाट, चित्तौरा झील, मंदिरों, शिल्प खरीदारी और पुराने शहर मार्गों के लिए अच्छा समय है। मानसून में वन हरे होते हैं, लेकिन सड़क, नदी और अभयारण्य पहुंच में सावधानी चाहिए।

मार्च से जून · 32-43 C

गर्मी

गरम और उमस भरी तराई गर्मी। मंदिर और शहर स्थल सुबह देखें; वन और नदी यात्रा में गर्मी की तैयारी रखें।

जुलाई से सितंबर · 27-35 C

मानसून

भारी बारिश, हरे वन और ऊंचे नदी जलस्तर। कतर्नियाघाट और ग्रामीण सड़कों की मौसमी पहुंच जांचें।

अक्टूबर से फरवरी · 12-26 C

सर्दी

वन्यजीव, चित्तौरा झील, सुहेलदेव स्मारक, मंदिर, शिल्प बाजार और शहर सैर के लिए सबसे अच्छा मौसम।

हवाई मार्ग

लखनऊ एयरपोर्ट

    रेल मार्ग

    गोंडा रेल लिंक से बहराइच

      सड़क मार्ग

      गोंडा, लखनऊ और तराई मार्ग